NEW WAVE EXCLUSIVE: अब वैध तरीके से होगा झारखंड में बालू का उठाव, खनन विभाग का बड़ा फैसला, डीसी करेंगे लीज डीड पर साइन, सीएम की मिली मंजूरी

Akshay Kumar Jha Ranchi: झारखंड में कंस्ट्रक्शन से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी खबर है. कई महीनों से बालू उठाव को...

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड में कंस्ट्रक्शन से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी खबर है. कई महीनों से बालू उठाव को लेकर फैले संशय अब खत्म हो गया. बालू उठाव पर एनजीटी की रोक से पहले खनन विभाग की तरफ से लिया गया यह काफी बड़ा कदम है. झारखंड सैंड माइनिंग रूल 2026 में एक संशोधन किया गया है. इस संशोधन के बाद बालू लीज की निगरानी का सारा जिम्मा जिले के डीसी के पास होगा. डीसी ही लीज डीड पर हस्ताक्षर करेंगे. डीसी के हस्ताक्षर के बाद ही बालू का उठाव संभव हो पाएगा. सीएम हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को इस फाइल पर साइन कर दिया. सीएम हेमंत की मंजूरी के बाद अब कल से यह नियम पूरे राज्य में लागू हो जाएगा. ऐसा होने के बाद अब राज्य के 35 बालू घाटों से बालू उठाना आसान हो जाएगा. इसके बाद बालू की कालाबाजारी पर पूरी तरह से रोक लगने की उम्मीद है. आए दिन बालू के अवैध ढुलाई की खबरों से विभाग पर ऊंगली उठ रही थी.

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एक महीने में उठ सकेगा पांच करोड़ सीएफटी बालू

झारखंड राज्य में कुल 444 बालू घाट हैं. इसमें से 290 बालूघाटों की नीलामी हो चुकी है. इन 290 बालूघाटों में से 35 घाटों के लिए सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं और खनन पट्टों के साथ संचालन के लिए तैयार है. ऐसा होने के बाद 35 घाटों से बालू का उठाव वैध तरीके से होने लगेगा. खनन विभाग के पुख्ता सूत्रों ने बताया कि इन 35 बालू घाटों से हर दिन करीब दस लाख सीएफटी बालू का उठाव किया जा सकेगा. साथ ही हर महीने करीब पांच करोड़ सीएफटी बालू का उठाव हो सकेगा. सुचारू रूप से एक महीने में इतने बालू का उठाव हो पाएगा. इससे एनजीटी की रोक लगने के बाद राज्य में बालू की शायद ही कमी हो.

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पांच महीने तक कोर्ट से रोक लगी रही

इससे पहले बालू घाटों कि नीलामी और उठाव पर कोर्ट की तरफ से पांच महीने तक रोक लगी रही. करीब पांच महीने तक कोर्ट के जटिल प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद जिलों के डीसी की तरफ से कई तरह की आपत्तियां जतायी गयी थी. विभाग की तरफ से सारे मामलों पर तफ्तीश से काम किया गया. अब जाकर सीएम हेमंत की मंजूरी के बाद वैध तरीके से बालू उठाव का रास्ता साफ हो चुका है. बालू उठाव को लेकर विपक्ष की तरफ से भी काफी बयानबाजी और राजनीति की जा रही थी. लेकिन इस कदम के बाद सारी अटकलों पर ताला लगना तय माना जा रहा है.

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