Ranchi: जिलों के कोषागार से अवैध तरीके से वेतन निकासी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अब जांच का फोकस मनी ट्रेल पर केंद्रित कर दिया है. एजेंसी उन बैंक खातों और ट्रांजेक्शन चैनलों की गहराई से जांच कर रही है, जिनके जरिए सरकारी राशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर किया गया. ईडी की प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि अवैध निकासी के बाद रकम को कई खातों में घुमाया गया, जिससे उसके वास्तविक स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके. अब एजेंसी इस पूरे फंड फ्लो को ट्रैक कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसे का अंतिम लाभार्थी कौन है.
सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे खाते भी जांच के दायरे में आए हैं, जिनका सीधा संबंध सरकारी कर्मचारियों से नहीं है. आशंका जताई जा रही है कि सिंडिकेट ने फर्जी या बेनामी खातों का इस्तेमाल कर पैसे को ठिकाने लगाया.

अन्य संपत्तियों में किए गए निवेश को खंगाला जा रहा है
ईडी अब इन खातों से जुड़ी संपत्तियों और निवेश की भी जांच कर रही है. जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों में किए गए निवेश को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं अवैध राशि को वैध दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई.
वहीं, पहले से गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के लिए एजेंसी रिमांड की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में कई नए नाम और पूरे नेटवर्क की परतें सामने आ सकती हैं.
पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचना आसान होगा
ईडी ने बोकारो, हजारीबाग और रांची में दर्ज मामलों को एक साथ जोड़कर जांच को व्यापक रूप दिया है. जिला पुलिस और सीआईडी की एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए 11 आरोपितों के खिलाफ जुटाए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों की एजेंसी गहन समीक्षा कर रही है. जांच एजेंसी का मानना है कि मनी ट्रेल की कड़ियां जुड़ने के बाद इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचना आसान होगा. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
