Hazaribagh : आज पूरे जिले में वट सावित्री पूजा की अद्भुत छटा देखने को मिल रही है, पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए सुहागिन महिलाओं ने सुबह से ही जिले के तमाम प्रमुख वट (बरगद) वृक्षों और मंदिरों का रुख कर लिया है. नए वस्त्रों और सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर, उसमें रक्षा सूत्र बांधकर अपने अखंड सौभाग्य की प्रार्थना कर रही हैं. इस बार हजारीबाग शहर के हृदय स्थल से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक, जिले के कोने-कोने में महिलाओं का पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा चरम पर है.
हजारीबाग शहरी क्षेत्र: इन प्रमुख आस्था केंद्रों पर उमड़ा जनसैलाब

शहर के मुख्य धार्मिक और पारंपरिक स्थलों पर सुबह से ही पैर रखने की जगह नहीं है, सुहागिनें अपनी अटूट श्रद्धा और भक्ति के साथ शहर के ये दोनों सबसे पुराने और श्रद्धेय स्थल हैं. यहां स्थित प्राचीन बरगद पेड़ों के नीचे पूजा करने के लिए सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ रही है. पूरा परिसर पारंपरिक गीतों और ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज रहा है. कदमा रोड स्थित शनि मंदिर के समीप जो वट वृक्ष है, वहां भी सुबह से ही सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है, महिलाएं कतारबद्ध होकर पूरी आस्था के साथ वट वृक्ष की परिक्रमा कर रही हैं, पंच मंदिर परिसर में भी सुबह से ही महिलाओं का तांता लगा हुआ है, जहां महिलाएं कतारबद्ध होकर कथा सुन रही हैं और पूजा-अर्चना कर रही हैं. शहर के बीचों-बीच स्थित झंडा चौक स्थित व्यापारिक और ऐतिहासिक क्षेत्र के बरगद पेड़ों के पास सुबह से ही सुहागिनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. झील के आसपास और इंदिरा गांधी स्कूल के समीप स्थित वट वृक्षों के नीचे भी इस बार भारी संख्या में महिलाएं सामूहिक रूप से सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती नजर आईं, मटवारी, ओकनी और डिस्ट्रिक्ट मोड़: इन रिहायशी इलाकों में भी महिलाओं ने स्थानीय बरगद पेड़ों को सींचकर बांस के पंखे (बेना) झलने की रस्म श्रद्धापूर्वक निभाई.
ग्रामीण इलाकों में भारी आस्था: जिले के सभी 16 प्रखंडों से आई खूबसूरत तस्वीरें
केवल शहरी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि हजारीबाग जिले के सभी 16 प्रखंडों के ग्रामीण अंचलों में भी इस महापर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, जिले के सभी प्रखंडों से सुबह से ही पूजा-अर्चनो की मनमोहक तस्वीरें सामने आ रही हैं, सदर हजारीबाग, इचाक, कटकमसांडी, कटकमदाग, बरही, चौपारण, बरकट्ठा, चलकुशा, पदमा, विष्णुगढ़, टाटीझरिया, दारू, डाढ़ी, बड़कागांव, केरेडारी और चुरचू प्रखंड के तमाम गांवों और पंचायतों में वट सावित्री की भारी धूम है. ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक परिधानों में टोलियां बनाकर गांव के मुख्य बरगद पेड़ों और मंदिरों की ओर निकल पड़ीं, हर प्रखंड के चौपालों और वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की असीम श्रद्धा और सनातन संस्कृति की सुंदर झलक साफ देखने को मिल रही है.
बाजारों में रही रौनक और उत्सव का माहौल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष (बरगद) में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है, इसी पेड़ के नीचे सती सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे. आज के दिन महिलाएं बरगद के पेड़ को सींचकर उसमें सात या 108 बार सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं और अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं. इस महापर्व को लेकर हजारीबाग के बाजारों में भी कल शाम से ही फल, फूल-माला, बांस के पंखे (बेना) और श्रृंगार के सामानों की दुकानों पर भारी भीड़ रही, आज सुबह से ही पूरा जिला पूरी तरह से भक्तिमय और उत्सव के माहौल में डूबा हुआ है.
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