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मांझीथान में प्रशासन का चाबी लगाना आदिवासी समाज का अपमान : बाबूलाल मरांडी

Giridih : मांझीथान कोई सरकारी भवन नहीं, बल्कि संताल समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान का केंद्र है. ऐसे पवित्र स्थल पर...

Giridih : मांझीथान कोई सरकारी भवन नहीं, बल्कि संताल समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान का केंद्र है. ऐसे पवित्र स्थल पर ताला लगाना और उसकी चाभी प्रशासन के पास रखना पूरे संताल समाज का अपमान है. ये बातें मधुबन प्रवास के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबुलाल मरांडी ने कहा. मरांडी इस दौरान मरांग बुरु दिशोम मांझीथान पहुंचे. जहां बंद मांझीथान देख मरांडी ने सरकार और प्रशासन के प्रति नराजगी व्यक्त की. स्थानीय लोगों ने मरांडी को बताया कि मांझीथान की चाबी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के पास रखी गई है. बंद मांझीथान को बाबूलाल मरांडी ने संताल समाज की आस्था, परंपरा और धार्मिक अधिकारों पर सीधा प्रशासनिक हस्तक्षेप करार दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल करते हुए कहा कि आखिर किस अधिकार से एक सरकारी पदाधिकारी आदिवासी धार्मिक स्थल को अपने नियंत्रण में रख सकता है. यदि आदिवासी समाज के धार्मिक स्थलों पर भी प्रशासन कब्जा जमाने लगेगा, तो आदिवासियों की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा कौन करेगा.

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मरांग बुरु दिसम मांझीथान में नियमित पूजा-अर्चना, उचित रखरखाव और परंपरा अनुसार नायके की नियुक्ति तत्काल सुनिश्चित की जाएं. अन्यथा अगली बार मधुबन आने पर वे स्वयं संताल समाज को संगठित कर मांझीथान का ताला खुलवाएंगे और समाज की सहभागिता से नायके की नियुक्ति और स्थायी आर्थिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे.

 

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