एक चश्मदीद की गवाही से हो गई गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव को उम्रकैद की सजा, पढ़िए कामेश्वर पांडे मर्डर केस के ट्रायल की पूरी स्टोरी

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: रामगढ़ सिविल कोर्ट ने शुक्रवार को वर्ष 2015 में हुए बहुचर्चित कामेश्वर पांडेय हत्याकांड में अपना फैसला सुना...

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: रामगढ़ सिविल कोर्ट ने शुक्रवार को वर्ष 2015 में हुए बहुचर्चित कामेश्वर पांडेय हत्याकांड में अपना फैसला सुना दिया है. अदालत ने इस मामले में कुख्यात गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और उसके सहयोगी लखन साव को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने अपने फैसले में दोषियों पर 1 लाख रुपये का मुआवजा भी लगाया है. यह पैसा मृतक कामेश्वर पांडे के परिवार को दिया जाएगा.

चश्मदीद गवाह की गवाही बनी सबसे अहम कड़ी

इस केस में सबसे अहम कड़ी मुख्य चश्मदीद गवाह अमित कुमार की रही. उसने अदालत में मजबूती से बयान दिया कि उसने अमन श्रीवास्तव को मृतक की कनपटी पर पिस्तौल सटाकर गोली मारते हुए खुद देखा था.

हालांकि बचाव पक्ष ने यह तर्क दिया था कि घटना के वक्त अमन बेंगलुरु और मुंबई में था. इसके समर्थन में हवाई टिकट और रेडिएंट लॉज (मुंबई) का बिल भी पेश किया गया था, लेकिन अदालत ने इन सबूतों को मानने से इंकार करते हुए कहा कि केवल टिकट और बिल से यह साबित नहीं होता कि उस पर वास्तव में अमन ने ही यात्रा की थी.

पतरातू बाजार में हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग

प्राथमिकी के मुताबिक, पतरातू के साप्ताहिक बाजार में कामेश्वर पांडेय अपने पुत्र पवन किशोर पांडेय के साथ मोटरसाइकिल से सब्जी खरीदने गए थे. तभी राम जानकी मंदिर के पास अपराधियों ने उन्हें घेर लिया और कामेश्वर पांडेय पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. गंभीर स्थिति में रिम्स ले जाने के दौरान रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया था. घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने भाग रहे अपराधियों को खदेड़ा था, जिसमें जुनैद नामक एक आरोपी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. यह घटना 26 अक्टूबर 2015 को हुई थी और घटना के दिन ही पतरातू थाना में FIR दर्ज की गई थी.

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22 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

पुलिस ने 30 अक्टूबर 2017 को आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद 12 जुलाई 2024 को आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम हुआ. 3 अगस्त 2024 को पुलिस ने कोर्ट में इस केस से जुड़े सभी साक्ष्य पेश किए. जिसके बाद 7 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने सभी गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाने के लिए 7 मई की तारीख मुकर्रर की. कोर्ट ने 15 मई को इस चर्चित केस में अपना फैसला सुनाया.

पुलिस ने इस केस को साबित करने के लिए कोर्ट में कुल 22 गवाह पेश किए, जिसमें 5 पुलिसकर्मी, एक हत्या का चश्मदीद गवाह और डॉक्टर समेत अन्य की गवाही सबसे महत्वपूर्ण रही. हालांकि पुलिस का एक गवाह कोर्ट में मुकर भी गया, लेकिन उसके बावजूद केस प्रभावित नहीं हुआ. इस केस के मुख्य आरोपी अमन श्रीवास्तव की ओर से अपने बचाव में कुल 2 गवाह पेश किए गए, लेकिन वे गवाह अमन को बेगुनाह साबित नहीं कर पाए.

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