Ranchi : झारखंड में ज़मीन के मामलों में लापरवाही और गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में सरकार ने धालभूमगढ़ (पूर्वी सिंहभूम) के तत्कालीन अंचल अधिकारी हरीशचंद्र मुंडा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने का फैसला लिया है. कार्मिक विभाग ने इस संबध में आदेश जारी कर दिया है.
क्या है पूरा मामला
मामला मौजा जुनबनी की करोड़ों की 15.98 एकड़ सरकारी और रैयती भूमि के अवैध म्यूटेशन (नामांतरण) से जुड़ा है. आरोप है कि तत्कालीन सीओ हरीशचंद्र मुंडा ने बिना किसी धरातलीय जांच और बिना भौतिक दखल-कब्जा देखें ही आवेदक प्रकाशचंद्र मुखर्जी के पक्ष में म्यूटेशन कर दिया. जिस ज़मीन का म्यूटेशन किया गया, उसमें से खाता नंबर 143, प्लॉट नंबर -749 की 9.15 एकड़ भूमि पहले से ही भू-हदबंदी अधिनियम के तहत विभिन्न गरीब रैयतों के नाम पर आवंटित (परवाना निर्गत) थी. उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम की जांच में यह गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया है.

रिटायर्ड आइएएस करेंगे जांच
सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी संजय सिन्हा को इस मामले का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है. भूमि सुधार उप समाहर्ता धालभूमगढ़ को सरकार का पक्ष रखने के लिए उपस्थापन पदाधिकारी बनाया गया है. सरकार ने आरोपी अधिकारी हरिशचंद्र मुंडा को आदेश दिया है कि वे 15 दिनों के भीतर संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना लिखित बचाव बयान दर्ज कराएं.
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