NewsWave खासः झारखंड में बदला ट्रेंड- ‘फादरहुड’ को प्राथमिकता दे रहे सरकारी कर्मचारी, साढ़े चार महीनों में 87 कर्मियों ने लिया पितृत्व अवकाश

Ranchi: झारखंड के सरकारी महकमों में कामकाजी संस्कृति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा...

Ranchi: झारखंड के सरकारी महकमों में कामकाजी संस्कृति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. नए जमाने के पिता अब केवल घर के खर्च चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे शिशु के जन्म के शुरुआती दिनों में मां और बच्चे की देखभाल में भी बढ़-चढ़कर हाथ बंटा रहे हैं. साल 2026 की शुरुआत से लेकर 16 मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कुल 87 कर्मियों ने पितृत्व अवकाश का लाभ लिया है. कार्मिक और गृह विभाग के स्तर से जारी यह आंकड़ा दर्शाता है कि पुरुष कर्मचारियों के बीच ‘एक्टिव फादरहुड’ और वर्क-लाइफ बैलेंस का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है.

पुलिस महकमे और गृह विभाग के जवान सबसे आगे

शिशु के जन्म के समय मिलने वाले इस विशेष अवकाश का लाभ उठाने में सबसे आगे गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (पुलिस महकमा) के जवान और अधिकारी रहे हैं. अमूमन अपनी व्यस्त और तनावपूर्ण ड्यूटी के लिए जाने जाने वाले पुलिसकर्मियों ने इस बार परिवार को प्राथमिकता दी.

झारखंड जगुआर और सैप के जवान

इस अवधि में रांची स्थित ‘झारखंड जगुआर’, झारखंड सशस्त्र पुलिस और स्पेशल इन्फैंट्री सुरक्षा बल, बोकारो के दर्जनों जवानों ने पितृत्व अवकाश लिया. इनमें सिपाही से लेकर सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं.

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जेल विभाग के अफसरों ने भी लिया अवकाश

रांची और अन्य जिलों के जेलर (पुरुष), जैसे कि मोहम्मद अब्दुस्सलाम, रमेश कुमार गोप और रवि कुमार ने भी इस दौरान अपने नवजात बच्चों के स्वागत और पत्नी की देखभाल के लिए छुट्टियां लीं.

जिलावार और विभागवार आंकड़े

धनबाद और बोकारो: इन दो जिलों में तैनात सिपाही, हवलदार और चतुर्थवर्गीय कर्मियों ने सबसे ज्यादा आवेदन किए और उन्हें समय पर अवकाश की स्वीकृति मिली.

रांची और अन्य जिले: राजधानी रांची सहित लातेहार, दुमका, जामताड़ा और पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम के कर्मियों ने भी इस सुविधा का लाभ लिया.

अन्य विभाग: गृह विभाग के अलावा श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग (दुमका) और वन एवं पर्यावरण विभाग (पश्चिमी सिंहभूम) के निम्नवर्गीय लिपिक व अन्य कर्मियों को भी विभाग द्वारा पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया गया.

क्यों बढ़ रहा है पितृत्व अवकाश का चलन

समाजशास्त्रियों और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सरकारी नियमों में ढील और जागरूकता के कारण अब पुरुष कर्मचारी इसे अपना अधिकार समझने लगे हैं. शिशु के जन्म के शुरुआती 15 दिन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहद नाजुक होते हैं. ऐसे में पुरुष कर्मचारियों को मिलने वाला यह अवकाश न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) के इस दौर में वरदान साबित हो रहा है.

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