Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के करोड़ों आदिवासियों की पहचान और अस्तित्व को लेकर दो टूक शब्दों में कहा है कि देश के करोड़ों आदिवासी समाज के लोगों के अस्तित्व, आस्था, संस्कृति और पहचान के सम्मान के लिए ‘अलग धर्म कोड’ वक्त की सबसे बड़ी मांग है. उन्होंने केंद्र सरकार से आगामी जनगणना में आदिवासियों के लिए आदिवासी-सरना धर्म कोड को शामिल करने की पुरजोर वकालत की है। मुख्यमंत्री का यह बयान देश के कोने-कोने में रह रहे आदिवासी समाज को मुख्यधारा में उनके सांस्कृतिक अधिकारों के साथ जोड़ने की एक गंभीर कोशिश है.
- अस्मिता की लड़ाई: सीएम के अनुसार, बिना अलग धर्म कोड के आदिवासियों की अनूठी सांस्कृतिक पहचान संकट में है.
- प्रकृति पूजक समाज: आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति पूजक रहा है, जिनकी परंपराएं और जीवन शैली अन्य प्रचलित धर्मों से बिल्कुल अलग हैं.
- जनगणना में हक: मांग की गई है कि जनगणना के फॉर्म में आदिवासियों को अपनी पहचान दर्ज करने के लिए एक स्वतंत्र कॉलम मिले.
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