हजारीबाग के स्वर्णकार व्यवसायियों का फूटा गुस्सा, बिजली संकट पर दी बाजार बंद और उग्र आंदोलन की चेतावनी

Hazaribagh: शहर में पिछले कई दिनों से चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर अब व्यापारियों का धैर्य जवाब दे गया है. हजारीबाग स्वर्णकार...

Hazaribagh: शहर में पिछले कई दिनों से चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर अब व्यापारियों का धैर्य जवाब दे गया है. हजारीबाग स्वर्णकार व्यवसायी संघ ने शहर और आसपास के इलाकों में जारी बदहाल बिजली आपूर्ति के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया है. संघ ने दो टूक लहजे में झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और बिजली विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो व्यापारी समाज चुप नहीं बैठेगा. जनहित में हजारीबाग बाजार को पूरी तरह बंद कराकर सड़कों पर जोरदार जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली विभाग की होगी.

24 घंटे में महज 5 से 6 घंटे बिजली, रसूखदार से लेकर आम नागरिक त्रस्त

​संघ के पदाधिकारियों ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि हजारीबाग में बिजली संकट अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है. पूरे दिन में बमुश्किल 5 से 6 घंटे ही बिजली नसीब हो पा रही है, जबकि कई मोहल्लों का हाल तो यह है कि वहां पूरे-पूरे दिन और रात बिजली नदारद रहती है. इस चिलचिलाती और भीषण गर्मी के बीच बिना बिजली के आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है. स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि लोग रात-रात भर सो नहीं पा रहे हैं.

ठप्प पड़ा कारोबार, छोटे कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

स्वर्णकार संघ ने कहा कि इस बिजली संकट की सबसे बड़ी मार छोटे व्यवसायों, कारखानों और दुकानदारों पर पड़ रही है. सोने-चांदी के आभूषणों के निर्माण से जुड़े अधिकांश कार्य आधुनिक और बिजली आधारित मशीनों व उपकरणों पर निर्भर हैं. लगातार हो रही अघोषित कटौती के कारण कारीगरों का काम पूरी तरह ठप्प पड़ गया है. उत्पादन रुकने से व्यापारियों को रोजाना भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं रोज कमाने-खाने वाले छोटे कारीगरों और मजदूरों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. ​व्यापारिक गतिविधियां कमजोर पड़ने से पूरे बाजार का माहौल खराब हो रहा है. दुकानदारों को मजबूरन जनरेटर और इन्वर्टर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है.

अंधेरे में पढ़ने को मजबूर छात्र, पेयजल संकट भी गहराया

​बिजली की इस आंख-मिचौली का सबसे खराब असर छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ रहा है. परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थी रात के अंधेरे और उमस भरी गर्मी में मोमबत्ती और लालटेन के सहारे पढ़ने को विवश हैं. इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क ठप्प होने से ऑनलाइन पढ़ाई भी पूरी तरह बाधित हो गई है. इसके अलावा, बिजली गुल रहने से शहर में पेयजल  का संकट भी गहरा गया है. जल संकट के कारण घरों में पानी की मोटर नहीं चल पा रही हैं, जिससे लोगों को दैनिक आवश्यकताओं के लिए बूंद-बूंद पानी को तरसना पड़ रहा है। अस्पतालों और क्लीनिकों में भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं.

एकजुटता की अपील: आर-पार की लड़ाई के मूड में व्यवसायी

​बिजली विभाग की इस शिथिलता से पूरे शहरवासियों में भारी नाराजगी है. स्वर्णकार व्यवसायी संघ ने साफ कर दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है. संघ ने हजारीबाग के सभी सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस बड़ी जनसमस्या के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है. व्यवसायियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सुध नहीं ली, तो हजारीबाग की सड़कों पर एक बड़ा ऐतिहासिक आंदोलन देखने को मिलेगा.

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