Report: Ravi Bharti

Ranchi: 18वीं लोकसभा के पहले सत्र से लेकर सातवें सत्र तक के आधिकारिक और प्रामाणिक आंकड़ों ने एक बेहद चौंकाने वाली और निराशाजनक तस्वीर पेश की है. खनिज संपदा से लबालब और विस्थापन, आदिवासी अधिकार तथा कोयला रॉयल्टी जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहे झारखंड के 14 लोकसभा सांसदों ने देश के इस सबसे बड़े मंच पर जैसे मौन व्रत धारण कर रखा है. अब तक सातों सत्र कुल समय अवधि 483 घंटे 48 मिनट और 10 सेकेंड की रही, लेकिन झारखंड के सांसदों को कुल बोलने का समय 13 घंटा 43 मिनट और 17 सेकेंड रहा. इस तरह झारखंड के सांसदों की कुल हिस्सेदारी 2.83 फीसदी रही. झारखंड का ओवर ऑल प्रदर्शन देश में 12वें नंबर पर रहा, जहां उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने हर सत्र में घंटों बहस कर सदन का ध्यान खींचा, वहीं झारखंड के माननीय कुछ ही घंटो में सिमटते नजर आए.
पहला सत्र : शुरुआत ही रही बेहद ठंडी, सिर्फ 41 मिनट की भागीदारी
पहले सत्र में संसद के भीतर कुल 28 घंटे 56 मिनट का कामकाज हुआ. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की रही, जिसके सांसदों ने 07 घंटे 05 मिनट (24.48%) तक बात रखी. महाराष्ट्र ने 02 घंटे 24 मिनट (8.29%) और बिहार ने 01 घंटे 40 मिनट (5.76%) समय लिया. इसके उलट, झारखंड के सभी सांसदों की कुल भागीदारी महज 41 मिनट (2.36%) रही और राज्य सीधे 14वें पायदान पर रहा.
दूसरा सत्र : 12वें स्थान पर ही थमा सफर
दूसरे सत्र के दौरान कुल 76 घंटे 03 मिनट की कार्यवाही दर्ज की गई. इस सत्र में झारखंड के सांसदों ने अपनी चुप्पी थोड़ी कम की, लेकिन वह नाकाफी थी. झारखंड को इस सत्र में कुल 02 घंटे 07 मिनट (2.78%) का समय मिला और राज्य 12वें स्थान पर रहा. इस सत्र में भी उत्तर प्रदेश 10 घंटे 28 मिनट (13.76%) और पड़ोसी बिहार 09 घंटे 16 मिनट (12.18%) के साथ हावी रहे.
तीसरा सत्र : भागीदारी का ग्राफ और नीचे गिरा
तीसरे सत्र में सुधार होने के बजाय झारखंड का प्रदर्शन और नीचे गिर गया. इस सत्र में झारखंड के लोकप्रतिनिधियों को कुल मिलाकर महज 26 मिनट (1.14%) का समय मिला, जिससे राज्य 17वें स्थान पर खिसक गया. दूसरी ओर, यूपी ने 07 घंटे 09 मिनट (18.80%) और बिहार ने 04 घंटे 54 मिनट (12.88%) की भागीदारी के साथ दबदबा बनाए रखा.
चौथा सत्र : 3 घंटे बोले, पर बड़े राज्यों से मीलों पीछे
चौथे सत्र में सदन की समय अवधि लंबी थी, जिससे झारखंड को 03 घंटे 13 मिनट 41 सेकंड (2.62%) का समय मिला. हालांकि, बड़े राज्यों के सामने यह बेहद बौना था. इस सत्र में उत्तर प्रदेश के सांसदों ने 20 घंटे 08 मिनट 54 सेकंड (16.36%), महाराष्ट्र ने 15 घंटे 13 मिनट 09 सेकंड (12.36%) और बिहार ने 12 घंटे 32 मिनट 54 सेकंड (10.19%) तक सदन का पोडियम गूंजने पर मजबूर किया. झारखंड इस सत्र में 12वें स्थान पर रहा.
पांचवां और छठा सत्र : सुस्ती बरकरार, सिर्फ 33 मिनट
पांचवें और छठे सत्र के आंकड़े झारखंड के लिए बिल्कुल एक जैसे और आत्मचिंतन कराने वाले रहे. इन दोनों सत्रों में राज्य के हिस्से सिर्फ 33 मिनट (1.96%) आए, जिससे झारखंड 17वें स्थान पर टिका रहा. इसी अवधि में यूपी ने 06 घंटे 05 मिनट 45 सेकंड (21.76%) और बिहार ने 02 घंटे 17 मिनट 05 सेकंड (8.15%) का बड़ा समय भुनाया. गुजरात के सांसदों ने भी 01 घंटे 39 मिनट 57 सेकंड (5.95%) समय लेकर झारखंड को पीछे धकेल दिया.
सातवां सत्र: आखिरी पड़ाव में भी नहीं टूटी खामोशी
इस सत्र में सदन का कुल समय 121 घंटे 15 मिनट 05 सेकंड दर्ज किया गया. इतने बड़े समय में झारखंड के सभी सांसदों को मिलाकर कुल बोलने का समय महज 04 घंटे 09 मिनट 36 सेकंड (3.43%) रहा, जिसके चलते राज्य 12वें पायदान पर ही सिमटा रहा, जबकि इस अंतिम पड़ाव में भी उत्तर प्रदेश ने 20 घंटे 01 मिनट 03 सेकंड (16.51%), महाराष्ट्र ने 14 घंटे 16 मिनट 26 सेकंड (11.77%) और बिहार ने 10 घंटे 34 मिनट 54 सेकंड (8.73%) तक जमकर दहाड़ लगाई.
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