भारतीय पर्वत संरक्षण एवं संवर्धन विधेयक 2026 का प्रारूप सार्वजनिक, जमशेदपुर राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र को भेजने पर होगा महामंथन

Ranchi: देश की संकटग्रस्त नदियों और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को कानूनी सुरक्षा कवच देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया...

Ranchi: देश की संकटग्रस्त नदियों और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को कानूनी सुरक्षा कवच देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. जमशेदपुर में आगामी 22 और 23 मई को आयोजित होने वाले “पहाड़ एवं नदी पर राष्ट्रीय सम्मेलन” से पहले इसके विधिक मसौदे को आज सार्वजनिक कर दिया गया. सम्मेलन के संरक्षक व जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय और संयोजक दिनेश मिश्र ने संयुक्त रूप से “भारतीय पर्वत संरक्षण, संरक्षण एवं संवर्धन विधेयक, 2026” का प्रारूप जारी किया. व्यापक विचार-विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप देकर अधिनियमन के लिए भारत सरकार को सौंपा जाएगा. यह प्रस्तावित विधेयक संविधान के अनुच्छेद 48ए और 51ए(ग) के तहत पर्यावरण संरक्षण के नागरिकों और राज्य के कर्तव्यों को सुदृढ़ करता है. इसके तहत पूरे देश के पर्वतीय क्षेत्रों को मुख्य संरक्षण क्षेत्र, विनियमित बफर क्षेत्र और सतत उपयोग क्षेत्र में वर्गीकृत करने का प्रावधान है.

क्या है विधेयक के प्रावधान

पूर्ण प्रतिबंध (मुख्य संरक्षण क्षेत्र): बड़े पैमाने पर खनन, रेत उत्खनन, वनों की कटाई, बड़े बांधों के निर्माण, खतरनाक अपशिष्ट निपटान और हिमनदों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी. इसके अलावा 20 कमरों से बड़े होटल और 3,500 मीटर से ऊपर सड़क निर्माण को प्रतिबंधित किया गया है.

संस्थागत ढांचा और दंड: नीति निर्धारण व निगरानी के लिए एक ‘राष्ट्रीय पर्वत संरक्षण प्राधिकरण’ और ‘पर्वत संरक्षण कोष’ का गठन किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने पर 5 वर्ष तक की कैद और ₹10 लाख से ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है.

स्थानीय समुदायों के अधिकार: वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, साथ ही पर्यावरण पर्यटन के लाभ में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी.

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