Hazaribagh : शादियों का सीजन शुरू होते ही हजारीबाग शहर की सड़कों पर रेंगता हुआ ट्रैफिक, बैंक्वेट हॉलों के बाहर वीआईपी गाड़ियों की वजह से घंटों लगने वाला महाजाम और देर रात तक बजने वाले कानफाड़ू डीजे से परेशान शहरवासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. शहर की इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासनिक महकमा पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है. सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय ने एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें सहायक नगर आयुक्त अनिल पाण्डेय, शहर के सभी थाना प्रभारी और अग्निशमन पदाधिकारी मौजूद रहे।.इस बैठक में शहर के सभी मैरेज हॉल, बैंक्वेट हॉल और होटलों के संचालकों को बुलाकर दो टूक हिदायत दी गई है कि अगर नियमों में रत्ती भर भी लापरवाही मिली, तो प्रतिष्ठान को सीधे ‘सील’ कर ताला जड़ दिया जाएगा.

रात 10 बजते ही थम जाएगी डीजे की धमक, पुलिस करेगी ऑन-स्पॉट जब्ती
हजारीबाग शहर के कई मोहल्लों में देर रात तक बजने वाले डीजे के कारण बुजुर्गों, बीमारों और पढ़ाई कर रहे छात्रों का जीना मुहाल रहता है. प्रशासन ने इस पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगाने का मन बना लिया है. एसडीओ आदित्य पांडेय ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि रात 10:00 बजे के बाद किसी भी मैरेज हॉल या होटल में तेज आवाज में लाउडस्पीकर या डीजे नहीं गूंजेगा. अगर किसी भी संचालक ने इस नियम को हल्के में लिया, तो संबंधित इलाके के थाना प्रभारी तुरंत छापेमारी करेंगे और न सिर्फ डीजे बंद कराएंगे, बल्कि साउंड सिस्टम के सारे कीमती उपकरणों को ऑन-स्पॉट जब्त कर भारी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही, सभी संचालकों के लिए नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है.
रोड पर गाड़ियां पार्क कीं तो खैर नहीं, मैरेज हॉल के अंदर ही बनानी होगी पार्किंग
अक्सर देखा जाता है कि मैरेज हॉल और बैंक्वेट हॉलों में क्षमता से अधिक बुकिंग कर ली जाती है, जिसके बाद मेहमान अपनी गाड़ियां मुख्य सड़कों पर पार्क कर देते हैं. इससे पूरा शहर जाम की कतारों में खड़ा हो जाता है. इस मनमानी को रोकने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. अब हर हाल में संचालकों को अपने परिसर के भीतर ही पार्किंग की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी, सड़कों पर एक भी गाड़ी खड़ी पाई गई, तो जिम्मेदारी मैरेज हॉल प्रबंधन की होगी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एंट्री और एग्जिट के अलग-अलग रास्ते बनाने होंगे, साथ ही पूरे परिसर को हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरों और फर्स्ट एड की सुविधाओं से लैस करना होगा. दिल्ली और अन्य बड़े शहरों के हादसों से सबक लेते हुए फायर एनओसी को भी पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है.
स्वच्छता पर ‘कलर कोडेड’ पहरा: रखने होंगे 4 रंग के डस्टबिन
बैठक में सहायक नगर आयुक्त अनिल पाण्डेय ने शहर की सफाई को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी गाइडलाइन जारी की. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली’ को अब होटलों और मैरेज हॉलों में कड़ाई से लागू किया जा रहा है. अब हर परिसर में कचरा फेंकने के लिए चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन रखने होंगे. हरा डस्टबिन: केवल गीले कचरे के लिए. नीला डस्टबिन: सूखे कचरे के लिए।काला डस्टबिन: खतरनाक घरेलू कचरे के लिए. पीला डस्टबिन: जैव-चिकित्सीय (बायो-मेडिकल) कचरे के लिए. इतना ही नहीं, जो होटल या मैरेज हॉल बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करते हैं, उन्हें अपने परिसर के भीतर ही गीले कचरे को नष्ट करने का प्लांट लगाना होगा. महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग तथा पूरी तरह से साफ-सुथरे टॉयलेट्स की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है. एसडीओ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह कोई सामान्य बैठक नहीं बल्कि अंतिम चेतावनी है. कागजों पर नियम मानने वाले दिन अब लद चुके हैं, धरातल पर गड़बड़ी मिली तो सीधा ताला लटकेगा.
Also Read : लैंड ऑफ फ्यूचर के रूप में उभर रहा राज्य, अपार संभावनाएं: राममोहन नायडू
