Ranchi : राज्य को देश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनाने के संकल्प के साथ झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) ने अपने दरवाजे निवेशकों के लिए पूरी तरह खोल दिया हैं. जियाडा के नवीनतम लैंड बैंक (जमीन के आंकड़ों) से साफ है कि राज्य के चारों प्रमुख रीजन रांची, आदित्यपुर, बोकारो और संथाल परगना में उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर वेकेंट प्लॉट उपलब्ध हैं. सरकार अब रेड-टेपिज्म को खत्म कर रेड कारपेट की नीति पर चल रही है. सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए पारदर्शी और बेहद तेज गति से जमीन का आवंटन किया जा रहा है. चाहे वह आईटी सेक्टर हो, फूड प्रोसेसिंग हो, फार्मा हो या फिर भारी उद्योग.झारखंड का इंफ्रास्ट्रक्चर हर सेक्टर को पंख लगाने के लिए तैयार है.

रांची रीजन : राजधानी के पास कनेक्टिविटी का बेजोड़ फायदा
रांची और इसके आस-पास के क्षेत्रों में उद्योग लगाने का सबसे बड़ा फायदा बेहतरीन लॉजिस्टिक्स और एयरपोर्ट रेलवे कनेक्टिविटी का मिलना है. हालांकि मुख्य शहर के नजदीकी इलाकों में मांग बहुत ज्यादा है. लेकिन ग्रामीण और नए विकसित हो रहे इंडस्ट्रियल एरिया में निवेशकों के लिए बेहतरीन मौके मौजूद हैं.
- तुपुदाना इंडस्ट्रियल एरिया : उद्योगों की पहली पसंद बने इस क्षेत्र में कुल 331 प्लॉटों में से 313 आवंटित हो चुके हैं, जबकि 18 प्लॉट खाली हैं.
- कोकर इंडस्ट्रियल एरिया : यहां कुल 191 प्लॉट हैं, जिनमें से 156 आवंटित हैं और 35 प्लॉट खाली हैं.
- नामकुम इंडस्ट्रियल एरिया : कुल 51 प्लॉटों में से 48 आवंटित हैं. केवल 3 प्लॉट खाली हैं.
- पतरातू इंडस्ट्रियल एरिया : बिजली और पानी की प्रचुर उपलब्धता वाले इस क्षेत्र में कुल 141 प्लॉटों में से 120 आवंटित हैं और 21 प्लॉट खाली हैं.
- लोहरदगा इंडस्ट्रियल एरिया : यहां निवेशकों के लिए बड़ा स्कोप है. कुल 108 प्लॉटों में से 67 आवंटित हो चुके हैं. जबकि 41 प्लॉट खाली हैं.
- ओरमांझी (दरदाग और चकला) : कुल 72 प्लॉटों में से 70 आवंटित हैं. यहां सिर्फ 2 प्लॉट खाली हैं.
- टाटीसिलवे इंडस्ट्रियल एरिया : दो अलग अलग फेजों को मिलाकर देखें तो यहां करीब 11 से 12 प्लॉट अभी खाली पड़े हैं.
- आईटी टावर, नामकुम : अगर आप सॉफ्टवेयर, बीपीओ या टेक स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो आईटी सेक्टर के लिए यहां 15 प्लॉट खाली हैं.
आदित्यपुर रीजन : एशिया के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल हब में नया विस्तार
- फेज 1 (आदित्यपुर) : यहां कुल 328 प्लॉट हैं. जिनमें से 295 आवंटित हैं और 33 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 2 (आदित्यपुर) : 268 प्लॉटों में से 255 आवंटित हैं. यहां 13 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 3 (आदित्यपुर) : कुल 210 प्लॉट हैं, जिनमें से 117 आवंटित हो चुके हैं और 93 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 4 (आदित्यपुर) : 140 प्लॉटों में से 129 आवंटित हैं, यहां 11 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 5 : यहां कुल 91 प्लॉटों में से 83 आवंटित हैं, केवल 8 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 7 : भारी मांग वाले इस फेज में कुल 145 प्लॉटों में से 121 आवंटित हैं और 24 प्लॉट खाली हैं.
- फेज 8 : यह बिल्कुल शुरुआती चरण में है. कुल 14 प्लॉटों में से 13 आवंटित हैं, 1 प्लॉट खाली है.
- लार्ज सेक्टरः बड़े और भारी उद्योगों के लिए विशेष रूप से तैयार इस सेक्टर में 407 बड़े प्लॉट हैं. जिनमें से 397 आवंटित हो चुके हैं और 10 प्लॉट खाली हैं.
- ईएमसी प्लॉट्स (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर फेज 7 के पास : हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए यहां कुल 93 प्लॉट हैं- जिनमें से 57 आवंटित हैं और 36 प्लॉट खाली हैं.
बोकारो रीजन : कोयलांचल और स्टील सिटी में एमएसएमई के लिए हॉटस्पॉट
- बालीडीह फेज 1 : यहां कुल 252 प्लॉट हैं. जिनमें से 207 आवंटित हो चुके हैं और 45 प्लॉट खाली हैं.
- बालीडीह फेज 2 : कुल 140 प्लॉटों में से 114 आवंटित हैं, जबकि 26 प्लॉट खाली हैं.
- बालीडीह फेज 3 : यहां कुल 167 प्लॉट हैं, जिनमें से सिर्फ 69 आवंटित हैं और 98 प्लॉट खाली हैं। नए स्टार्टअप और उद्योगों के लिए यह सबसे बड़ा मौका है.
- बालीडीह फेज 4 : कुल 165 प्लॉटों में से 116 आवंटित हैं, यहाँ 49 प्लॉट खाली हैं.
- कन्दरा इंडस्ट्रियल एरिया, गोविंदपुर (धनबाद) : यहां कुल 150 प्लॉट हैं, जिनमें से 52 आवंटित हैं और 98 प्लॉट खाली हैं। धनबाद के नजदीक होने के कारण यह लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) के लिए सबसे मुफीद हॉटस्पॉट है.
- सिंदरी इंडस्ट्रियल एरिया, डोमगढ़ : कुल 124 प्लॉटों में से 73 आवंटित हैं, यहाँ 51 प्लॉट खाली हैं.
- गिरिडीह इंडस्ट्रियल एरिया, सिहोडीह : कुल 68 प्लॉटों में से 26 आवंटित हैं, यहाँ 42 प्लॉट खाली हैं.
संथाल परगना रीजन ; फार्मा, प्लास्टिक और फूड प्रोसेसिंग का नया एक्सप्रेसवे
देवघर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एम्स के शुरू होने के बाद संथाल परगना रीजन में औद्योगिक विकास की जैसे बाढ़ आ गई है. बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमाओं से सटे होने के कारण यह क्षेत्र नए मार्केट तक पहुंच बनाने के लिए सबसे बेहतरीन माना जा रहा है.
- जसीडीह इंडस्ट्रियल एरिया फेज 1 : कुल 198 प्लॉटों में से 140 आवंटित हैं, जबकि 58 प्लॉट खाली हैं.
- जसीडीह इंडस्ट्रियल एरिया फेज 2 : कुल 67 प्लॉटों में से 52 आवंटित हैं, यहां 15 प्लॉट खाली हैं.
- देवीपुर इंडस्ट्रियल एरिया : केमिकल, प्लास्टिक हब और फार्मा (दवा) कंपनियों के लिए यह क्षेत्र सबसे तेजी से उभर रहा है- यहां कुल 171 प्लॉटों में से 95 आवंटित हो चुके हैं, जबकि 76 प्लॉट खाली हैं.
- रूरल इंडस्ट्रियल एस्टेट, डाबरग्राम : कुल 46 प्लॉट हैं, जिनमें से 43 आवंटित हैं, केवल 3 प्लॉट खाली हैं.
- मिहिजाम इंडस्ट्रियल एरिया : कुल 30 प्लॉटों में से 28 आवंटित हैं, यहाँ 2 प्लॉट खाली हैं.
- बाबूराम इंडस्ट्रियल एरिया, दुमका : कुल 36 प्लॉटों में से सभी 36 आवंटित हो चुके हैं.
क्यों झारखंड बन रहा है पहली पसंद
- इज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में आसानी) : झारखंड सरकार ने अपनी नीतियों को बेहद लचीला बनाया है. सिंगल विंडो क्लीयरेंस के कारण अब निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते.
- सस्ते और हुनरमंद श्रमिक : राज्य में कुशल और अर्ध-कुशल जनशक्ति की कोई कमी नहीं है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट (उत्पादन लागत) काफी कम हो जाती है.
- रॉ मैटेरियल (कच्चे माल) की प्रचुरता : खनिज संपदा से समृद्ध होने के कारण स्टील, सीमेंट और मेटल आधारित उद्योगों को यहाँ सीधा फायदा मिलता है.
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