हजारीबाग : बड़े भाई और छोटे भाई के खींचतान में जनता का नुकसान, गर्मी में बिजली गूल, चापानल सूखें

Hazaribagh : जिला में विधायक और सांसद के बीच चल रही खींच तान का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है. जहां...

Hazaribagh : जिला में विधायक और सांसद के बीच चल रही खींच तान का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है. जहां एक ओर विधायक और सांसद दो हिस्से में बंटते नजर आ रहे है. सांसद और विधायक में ये खींचतान सम्मान की है. जहां एक ओर सांसद खुद को सदर विधायक का बड़ा भाई बतातें है. तो वहीं सदर विधायक समर्थक अपने नेता के अनादर के विरोध को जायज बता रहे है. सांसद का साफ कहना है कि उनके “छोटे भाई” का अपमान हुआ तो वे चुप नहीं बैठेंगे.
वहीं जनता जन समस्याओं से जूझ रही है. बढ़ती गर्मी के बीच जहां अस्पतालों में अव्यवस्था और बदहाली है, तो वहीं बिजली पानी जैसी समस्या से लोग परेशान है. वहीं, सांसद और विधायक बयानबाजी ऐसे कर रहे है मानो जिले की सबसे बड़ी समस्या जनता नहीं, बल्कि नेताओं का सम्मान बन गया हो.

भीषण गर्मी में चार से पांच घंटे बिजली

हजारीबाग इस समय भीषण गर्मी और बदहाल व्यवस्था से जूझ रहा है. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली संकट चरम पर है. कई मोहल्लों और गांवों में 24 घंटे में मुश्किल से 4-5 घंटे बिजली मिल रही है. लोग रातभर जागने को मजबूर हैं. बच्चे पढ़ नहीं पा रहे. बुजुर्ग परेशान हैं और मरीजों की हालत बदतर हो रही है. पानी की स्थिति भी भयावह है. चापानल सूख चुके हैं, टैंकर व्यवस्था नाकाफी है और नगर निगम की आपूर्ति भी लड़खड़ा चुकी है. लोग सुबह से बाल्टी लेकर लाइन में खड़े रहने को विवश हैं. मगर सत्ता के दोनों बड़े चेहरे इन बुनियादी सवालों पर आक्रामक नहीं दिखते.

सड़क और अस्तपाल की व्यवस्था चरमरायी

हजारीबाग की सड़कें लंबे समय से बदहाली का शिकार हैं. सड़कों पर गड्ढों है. जबकि ग्रामीण इलाकों में बरसात से पहले ही सड़कें जवाब दे चुकी हैं. सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छिपी नहीं. सदर अस्पताल में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी लगातार सवालों के घेरे में है. मरीजों को रेफर कर देना यहां आम बात हो गई है. गांवों के स्वास्थय केंद्रों में ताले लटकते मिलते हैं. लेकिन इन मुद्दों पर न तो संसद में आवाज गूंजती दिखती है और न सड़क पर बड़ा आंदोलन.

भाजपा कार्यकर्ता भी असमंजस में

इस विवाद ने भाजपा संगठन के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी है. कार्यकर्ता खुलकर दो खेमों में बंटते दिखाई दे रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक समर्थक एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कई पुराने कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह टकराव पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है. इसमें सबसे अधिक नुकसान जनता का हो रहा है. जनता गर्मी में तड़प रही है, व्यवस्था चरमरा रही है और नेता अपने अपने सम्मान की ढाल लेकर खड़े हैं

 

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