Ranchi: गुमला के तत्कालीन क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी अवधेश राम खिलाफ चल रही विभागीय जांच में उनके खिलाफ चल रहे आरोप प्रमाणित हो गए हैं. जांच पदाधिकारी ने उनके खिलाफ लगे सभी गंभीर आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित (साबित) कर दिया है. इसके बाद अब झारखंड पेंशन नियमावली के कड़े नियम 43 (ख) के तहत दंड का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है. इधर, आरोपी अधिकारी सजा के डर से या किसी रणनीति के तहत लगातार अंडरग्राउंड चल रहे हैं. विभाग उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने का आखिरी मौका (द्वितीय कारण पृच्छा) देने के लिए उनके पते पर एक के बाद एक कई नोटिस भेज चुका है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2025 से लेकर अप्रैल 2026 तक चार-चार बार अल्टीमेटम भेजा गया. हैरानी की बात यह है कि न तो इन पत्रों का कोई जवाब आया और न ही डाक विभाग से ये पत्र वापस लौटे.

पूर्व अधिकारी मौन साधे बैठे हैं
पूर्व शिक्षा पदाधिकारी अब तक मौन साधे बैठे हैं. लेकिन अब विभाग के सब्र का बांध टूट चुका है. विभाग ने अब सार्वजनिक रूप से अंतिम चेतावनी (अल्टीमेटम) जारी कर दी है. अवधेश राम को साफ लहजे में हिदायत दी गई है कि एक पक्ष (15 दिन) के भीतर अपना द्वितीय कारण पृच्छा प्रतिवेदन विभाग को सौंप दें. अगर इस बार भी वे चूकते हैं, तो विभाग यह मानकर चलेगा कि उन्हें अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है, और फाइलों में मौजूद पुख्ता सबूतों के आधार पर उनके खिलाफ तत्काल एकतरफा (एकपक्षीय) दंडात्मक कार्रवाई का फैसला ले लिया जाएगा. अब गेंद रिटायर्ड अधिकारी के पाले में हैया तो वे सामने आएं, या फिर कठोर दंडात्मक निर्णय भुगतने के लिए तैयार रहें.
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