Dheeraj Kumar

Ranchi. एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा सारंडा जंगल छोड़ चुका है. जंगल छोड़कर अब सुरक्षित ठिकानों पर मिसिर बेसरा पहुंच गया है. मिसिर बेसरा लगातार झारखंड पुलिस और जांच एजेंसियों के संपर्क में है. मिली जानकारी के अनुसार तीन से चार महीने में कभी भी मिसिर बेसरा सरेंडर कर सकता है. मिसिर बेसरा के साथ अन्य नक्सली भी सुरक्षित ठिकानों पर रह रहे हैं. वहीं से पूरे राज्य की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. मिसिर बेसरा लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है. इसलिए अब वह आत्मसमर्पण करने की राह पर है.
फिल्मी अंदाज में सरेंडर की तैयारी
मिली जानकारी के अनुसार मिसिर बेसरा फिल्मी स्टाइल में सरेंडर करेगा. इसके लिए वह लगातार रणनीति बना रहा है. इसके साथ उसके कई करीबी नक्सली भी रह रहे हैं और सभी लोग एक साथ सरेंडर कर सकते हैं. मिसिर बेसरा के सरेंडर के बाद झारखंड राज्य नक्सल मुक्त होने की संभावना जताई जा रही है. मिसिर बेसरा और अन्य नक्सलियों ने पिछले कई वर्षों से राज्य में कोहराम मचा रखा था. नक्सली गतिविधियों में कई सुरक्षाबलों और राज्य पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगाते हुए शहादत हासिल की है.
सुरक्षा अभियान से बिखरा नेटवर्क
आपको बता दें कि झारखंड में सक्रिय नक्सलियों और उग्रवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है. राज्य में आतंक का पर्याय रहा कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है. लगातार बढ़ते दबाव और सुरक्षा बलों की चौतरफा घेराबंदी के कारण मिसिर बेसरा का पूरा कुनबा ध्वस्त हो गया है.
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सारंडा-कोल्हान में चला बड़ा अभियान
बीते कुछ समय से झारखंड के कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चला रखा है. इस अभियान के तहत मिसिर बेसरा के दस्ते को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. उसके कई भरोसेमंद सहयोगी या तो मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं या फिर पुलिस की गिरफ्त में हैं. मिसिर बेसरा का मुख्य दस्ता पूरी तरह बिखर गया है. इसी हताशा में वह अपने बचे-खुचे सहयोगियों के साथ सुरक्षित ठिकानों पर रह रहा है.
जांच एजेंसियों के संपर्क में होने की चर्चा
मिसिर बेसरा और उसके करीबी सहयोगियों के जांच एजेंसियों और पुलिस के आला अधिकारियों के संपर्क में होने की जानकारी सामने आ रही है. वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने की योजना बना रहा है. पुलिस प्रशासन और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इस इनपुट के बाद पूरी तरह सतर्क हैं. मिसिर बेसरा और सहयोगी नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
सरेंडर से संगठन को लगेगा बड़ा झटका
मिसिर बेसरा का सरेंडर करना माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका साबित हो सकता है. बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है और वह कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है. संगठन में उसकी पकड़ और रणनीतिक समझ को देखते हुए उसे शीर्ष नेतृत्व में गिना जाता था. जांच एजेंसियों को नक्सली नेटवर्क, उनके फंडिंग सोर्स और भविष्य की योजनाओं के बारे में कई अहम और गुप्त जानकारियां मिल सकती हैं.
आत्मसमर्पण नीति का दिख रहा असर
झारखंड पुलिस और सरकार की पुनर्वास नीतियों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो भी नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है, उसे नियमानुसार पूरा सहयोग और सुरक्षा दी जाएगी. मिसिर बेसरा के इस कदम के बाद संगठन के बचे हुए अन्य नक्सलियों का मनोबल भी पूरी तरह टूट सकता है.
