EXCLUSIVE-  श्वेता वर्मा ने जिस भूमि का चंद्र प्रकाश धेलिया के नाम पर किया म्यूटेशन, नामकुम अंचल से गायब है उसी का लैंड रिकॉर्ड

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची के नामकुम इलाके में हुई भूमि की खरीद-बिक्री और अंचल...

विनीत आभा उपाध्याय 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची के नामकुम इलाके में हुई भूमि की खरीद-बिक्री और अंचल के दस्तावेजों में हेरफेर की जाँच एसीबी ने शुरू कर दी है. प्रारंभिक जाँच में घोटाले और गड़बड़ी की पुष्टि के बाद एजेंसी इस मामले में पीई दर्ज करने की अनुमति मांगी है.

जमीन से जुड़े मूल दस्तावेज गायब 

एसीबी ने अपनी अब तक की जांच में यह पाया है कि नामकुम अंचल के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32, प्लॉट नंबर 776, 820 और 821 जिसका कुल रकबा 1.22 एकड़ है. और इस जमीन की बिक्री डीड नंबर 30931/26404 के माध्यम से की गई है. इस जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) केस नंबर 356 R 27/2013-14 के जरिए किया गया था.यह म्यूटेशन तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) डॉ. श्वेता वर्मा ने 11 मई 2013 को प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी के निदेशक चंद्र प्रकाश धेलिया के नाम पर किया था. लेकिन जब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस भूमि से जुड़े दस्तावे के लिए फाइलों की खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि अंचल कार्यालय से इस म्यूटेशन केस के संपूर्ण मूल दस्तावेज ही गायब हैं.

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एसीबी ने इनकी भूमिका को माना संदिग्ध 

एसीबी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार की भूमिका को बेहद संदिग्ध और गंभीर माना है. फिलहाल नामकुम सीओ के पद पर कार्यरत कमल किशोर सिंह ने जब फाइलों को खोजने और उपलब्ध कराने के लिए डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार को कई बार आधिकारिक पत्राचार किया लेकिन उन्होंने जानबूझकर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया. जांच में यह बेहद सनसनीखेज बात सामने आई है कि राजस्व कर्मचारी विक्रम महली की मृत्यु वर्ष 2023 में सेवाकाल के दौरान ही हो गई थी. डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार बार-बार दस्तावेज न देने के पीछे मृत कर्मचारी का मृत्यु प्रमाण पत्र अंचल कार्यालय में पेश कर अपने ऊपर से जिम्मेदारी हटाने और इसका गलत लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है.सीओ ऑफिस से किसी भूमि के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का गायब होना कोई सामान्य लापरवाही नहीं है. यह तत्कालीन अंचलाधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा, डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार, तत्कालीन अंचल निरीक्षक और अंचल कार्यालय के अन्य पदाधिकारियों और कर्मियों की आपसी मिलीभगत और साठगांठ की ओर साफ इशारा करता है क्योंकि बिना आधिकारिक संरक्षण के इतनी महत्वपूर्ण फाइलें कार्यालय से गायब नहीं की जा सकती.

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