Hazaribagh: हजारीबाग में जनगणना कार्य को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई ऑनलाइन व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है. प्रशासनिक स्तर पर इसे तकनीकी सुधार और आधुनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन जमीन पर ड्यूटी कर रहे प्रगणकों, शिक्षकों और कर्मियों के लिए यह व्यवस्था भारी परेशानी, मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट का कारण बनती दिखाई दे रही है.

ऑनलाइन सिस्टम के जरिए प्रगणक ब्लॉक और ड्यूटी का आवंटन जिस तरीके से किया गया है, उसने कई कर्मियों को उनके कार्यक्षेत्र से बहुत दूर भेज दिया. ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां किसी शिक्षक की ड्यूटी उसके विद्यालय या अपने पंचायत क्षेत्र में लगाने के बजाय 20 से 30 किलोमीटर दूर गांवों में लगा दी गई. कुछ कर्मियों को तो दूसरे प्रखंडों तक भेजे जाने की शिकायत है. इससे कर्मचारियों में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है.
ऑनलाइन सिस्टम” पर उठने लगे सवाल
जनगणना कार्य में लगे कर्मियों का कहना है कि तकनीक का उपयोग सुविधा के लिए होना चाहिए था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था ने उल्टा बोझ बढ़ा दिया है. जिन शिक्षकों को स्थानीय क्षेत्र की बेहतर जानकारी है, उन्हें दूरस्थ इलाकों में भेज दिया गया, जबकि कई अन्य कर्मियों को एक से अधिक प्रगणक ब्लॉक दे दिए गए. कर्मियों का कहना है कि कंप्यूटर आधारित आवंटन में स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान नहीं रखा गया. न दूरी देखी गई, न आवागमन की समस्या और न ही यह समझने की कोशिश हुई कि भीषण गर्मी में लगातार गांव-गांव घूमना कितना कठिन कार्य है. एक शिक्षक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा लग रहा है कि सिर्फ आदेश लागू करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था बनाई गई है.
भीषण गर्मी में ड्यूटी बना चुनौती
हजारीबाग समेत पूरे क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का असर है. तापमान लगातार 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है. ऐसे में दूर-दराज गांवों में जाकर घर-घर सर्वे करना कर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कई प्रगणकों का कहना है कि सुबह से शाम तक धूप में घूमने के कारण चक्कर, थकावट और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. जिन क्षेत्रों में यातायात की सुविधा कमजोर है, वहां स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है. कुछ महिला कर्मियों ने भी दूरी और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि कई गांव ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए पर्याप्त परिवहन व्यवस्था नहीं है, फिर भी ड्यूटी तय कर दी गई.
एक से अधिक ब्लॉक मिलने से बढ़ा दबाव
जनगणना कार्य में लगे कुछ कर्मचारियों को एक से अधिक प्रगणक ब्लॉक दिए जाने की शिकायत भी सामने आई है. कर्मियों का कहना है कि पहले से ही कार्य का दबाव अधिक है, ऊपर से अतिरिक्त ब्लॉक देकर काम को और कठिन बना दिया गया है. शिक्षकों का कहना है कि स्कूल की जिम्मेदारी अलग और जनगणना का कार्य अलग. दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है. कई शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें “मानव संसाधन” नहीं बल्कि “मशीन” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.
संवेदनशीलता की कमी महसूस कर रहे कर्मचारी
कर्मियों के बीच सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि पूरी प्रक्रिया में मानवीय पहलू लगभग गायब दिखाई देता है. ऑनलाइन आवंटन के दौरान यह नहीं देखा गया कि कौन कर्मचारी किस क्षेत्र से जुड़ा है, किसकी स्वास्थ्य स्थिति कैसी है या कौन कितनी दूरी तय करने में सक्षम है. कई प्रगणकों का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर सत्यापन और समन्वय किया जाता तो इस तरह की परेशानियां कम हो सकती थीं. केवल डिजिटल प्रक्रिया के भरोसे ड्यूटी तय कर देने से जमीनी वास्तविकताओं की अनदेखी हुई है.
तकनीक सुविधा बने, बोझ नहीं
विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन तकनीक तभी सफल मानी जाएगी जब उसमें मानवीय संवेदना और व्यावहारिक सोच भी शामिल हो. यदि किसी कर्मचारी को उसके क्षेत्र से बहुत दूर भेजा जाता है, पर्याप्त संसाधन नहीं दिए जाते और अत्यधिक गर्मी में लगातार फील्ड कार्य कराया जाता है, तो इसका असर न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा बल्कि जनगणना कार्य की गुणवत्ता पर भी दिखाई देगा.
प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
जनगणना कार्य में लगे कई कर्मियों और शिक्षकों ने प्रशासन से ड्यूटी आवंटन की समीक्षा करने की मांग की है. उनका कहना है कि स्थानीय क्षेत्र के अनुसार ड्यूटी तय की जाए, दूरी कम की जाए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति की जाए ताकि कार्य का दबाव संतुलित हो सके. कर्मियों का कहना है कि वे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के विरोध में नहीं हैं, लेकिन कार्य व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और व्यावहारिक कठिनाइयों का भी ध्यान रखा जाए.
तकनीक के साथ संवेदना भी जरूरी
हजारीबाग में जनगणना ड्यूटी को लेकर उठ रहे सवाल केवल एक जिले की समस्या नहीं, बल्कि उस सोच पर भी प्रश्नचिह्न हैं जिसमें तकनीक को समाधान मान लिया जाता है लेकिन जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. तकनीक तभी सफल होगी जब वह इंसानों के काम को आसान बनाए, न कि उन्हें अतिरिक्त तनाव और कठिनाई में धकेले. जनगणना जैसे बड़े कार्य में प्रशासनिक दक्षता के साथ मानवीय संवेदना और व्यावहारिक योजना भी उतनी ही जरूरी है.
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