Hazaribagh:नगर निगम ने शहर के सभी 36 वार्डों में सुचारू और समान जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. नगर आयुक्त ने नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर अतिरिक्त पाइपलाइन विस्तार, हाइड्रोलिक परीक्षण और जरूरत पड़ने पर नए जलमीनार निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मांगी है. नगर निगम का कहना है कि शहर के हर घर तक पर्याप्त दबाव के साथ पेयजल पहुंचाना अब प्राथमिकता बन चुका है, क्योंकि लगातार बढ़ती आबादी और नए मोहल्लों के विस्तार के कारण कई इलाके अब भी नियमित जलापूर्ति से वंचित हैं.

अमृत योजना के तहत चल रहा है जलापूर्ति नेटवर्क का विस्तार
नगर निगम के अनुसार, हजारीबाग शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य अमृत 1.0 योजना के तहत किया जा रहा है. इस परियोजना का क्रियान्वयन जुडको और कार्यदायी संस्था एलएंडटी के माध्यम से हो रहा है. वर्ष 2018 में तैयार संशोधित बीओक्यू के आधार पर 32 वार्डों के लिए लगभग 572 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन की डीपीआर बनाई गई थी. उस समय नगर निगम क्षेत्र सीमित था, इसलिए कई ग्रामीण और नए विकसित इलाके योजना के दायरे से बाहर रह गए थे.
नगर निगम विस्तार के बाद बढ़ी समस्या
वर्ष 2018 में नगर निगम क्षेत्र का विस्तार हुआ और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़कर कुल 36 वार्ड बनाए गए. इसके बाद कई नई बस्तियां, गली-मुहल्ले और विकसित कॉलोनियां अस्तित्व में आईं, लेकिन मूल जलापूर्ति योजना में शामिल नहीं होने के कारण वहां पाइपलाइन नेटवर्क नहीं बिछ पाया. इन इलाकों में रहने वाले लोगों को आज भी टैंकर, चापाकल और निजी जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट और गंभीर होता जा रहा है.
नागरिकों और पार्षदों की शिकायतों के बाद हुआ सर्वे
लगातार मिल रही शिकायतों और वार्ड पार्षदों के आवेदनों को देखते हुए वर्ष 2021 में एलएंडटी, चेन्नई द्वारा पुनः सर्वेक्षण कराया गया. सर्वे में सामने आया कि छूटे हुए इलाकों और नए विकसित क्षेत्रों को जोड़ने के लिए लगभग 52,889 मीटर यानी करीब 52.9 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन विस्तार की आवश्यकता है. नगर निगम का मानना है कि बिना इस अतिरिक्त नेटवर्क के शहर के सभी वार्डों में समान जलापूर्ति संभव नहीं होगी.
जल दबाव की होगी वैज्ञानिक जांच
नगर निगम अब सभी वार्डों में जल वितरण प्रणाली का हाइड्रोलिक परफॉर्मेंस टेस्ट कराने की तैयारी में है. यह परीक्षण जुडको के माध्यम से कराया जाएगा. इस टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंच रहा है या नहीं. अक्सर शहर के ऊंचे इलाकों और अंतिम छोर वाले मोहल्लों में कम दबाव के कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता. यदि जांच में किसी क्षेत्र में जल दबाव कम पाया जाता है, तो वहां अतिरिक्त पाइपलाइन, बूस्टर सिस्टम या नए जलमीनार निर्माण का प्रस्ताव लागू किया जाएगा.
24 घंटे जलापूर्ति का लक्ष्य, लेकिन चुनौती भी बड़ी
नगर निगम ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य शहरवासियों को निर्बाध 24×7 जलापूर्ति उपलब्ध कराना है. हालांकि इसके लिए केवल पाइपलाइन बिछाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जलस्रोत, स्टोरेज क्षमता और दबाव संतुलन पर भी समान रूप से काम करना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते अतिरिक्त पाइपलाइन और जलमीनार का निर्माण नहीं हुआ, तो भविष्य में शहर के कई हिस्सों में जल संकट और गहरा सकता है.
शहरवासियों को राहत की उम्मीद
नगर निगम के इस प्रस्ताव से उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है, जो वर्षों से नियमित पेयजल सुविधा का इंतजार कर रहे हैं. अब नजर राज्य सरकार की स्वीकृति पर टिकी है. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो हजारीबाग के सभी 36 वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने का रास्ता साफ हो जाएगा.
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