Hazaribagh : जो हाथ पिछले 25 वर्षों से लगातार हजारीबाग शहर की गंदगी साफ कर इसे चमकाने और सुंदर बनाए रखने में जुटे रहे, आज उन्हीं स्वाभिमानी हाथों को मौत के बाद अपने सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए सिस्टम की संवेदनहीनता का दंश झेलना पड़ा. हजारीबाग नगर निगम में ढाई दशकों से अपनी निरंतर सेवाएं दे रहीं गाड़ी खाना (अंबेडकर नगर) निवासी एक दैनिक महिला सफाई कर्मचारी का उचित और समय पर इलाज न मिलने के कारण अत्यंत दुखद निधन हो गया.

हड्डी की चोट बनी जानलेवा, आर्थिक तंगी ने छीनी जिंदगी; नगर निगम में विरोध सभा
हड्डी में चोट लगने के बाद घोर आर्थिक तंगी के कारण उनका समुचित उपचार नहीं हो सका, जिससे संक्रमण फैल गया और वह गंभीर बीमारी में तब्दील हो गया, इस हृदयविदारक घटना के बाद आज सुबह नगर निगम परिसर में एक आपात शोक सभा सह विरोध सभा का आयोजन किया गया. मृतका के सम्मान और व्यवस्था के प्रति उपजे गहरे आक्रोश के कारण आज पूरे हजारीबाग शहर का सफाई कार्य पूरी तरह स्थगित रहा, जिससे व्यवस्था को आईना दिखाने का काम किया गया है.
कागजों पर ही रह गए बोर्ड बैठक के नियम, दुःख की इस घड़ी में विभाग ने फेरा मुंह
शोक सभा में यूनियन अध्यक्ष विवेक कुमार वाल्मीकि ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड बैठक में पहले ही यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि ड्यूटी के दौरान किसी सफाई कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 10 हजार रुपये की आकस्मिक सम्मान राशि दी जाएगी. लेकिन इस मामले में पीड़ित परिवार को तय राशि समय पर नहीं मिली. उन्होंने कहा कि नियम बनने के बाद भी उसका जमीन पर पालन नहीं होना और संकट की घड़ी में परिवार को उनके अधिकार से वंचित रखना गंभीर और संवेदनशील मामला है.
ईएसआई के नियमों की प्रक्रियात्मक विडंबना, कागजी औपचारिकता बनी जी का जंजाल
रेफरल और प्राइवेट जांच के खेल ने ले ली गरीब सफाई कर्मी की जान
शोक सभा में जुटे सैकड़ों कर्मचारियों ने रुंधे गले से ईएसआई पैनल के अस्पतालों की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की, कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ईएसआई के पैनल में सम्मिलित चिकित्सालयों में बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक जांच उपकरणों की उपलब्धता अत्यंत सीमित है. कई बार गंभीर रूप से बीमार और चोटिल पीड़ित कर्मचारियों को अस्पताल प्रबंधन द्वारा सीधे बाहरी निजी केंद्रों से महंगी जांचें कराकर लाने का परामर्श (पर्चा) थमा दिया जाता है. अत्यंत सीमित आय और दैनिक मजदूरी पर गुजर-बसर करने वाले इन गरीब सफाई कर्मियों के लिए प्राइवेट सेंटरों से हजारों रुपये की महंगी जांचें करवाना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन होता है, जिसके कारण सामान्य चोट और बीमारियां भी समय के साथ असाध्य रूप ले लेती हैं और अंततः उनकी जान पर बन आती है.
निगम हुआ फेल तो साथी सफाई मित्रों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर निभाया भाईचारा
अध्यक्ष विवेक वाल्मीकि ने बताया कि मृतका के निधन के बाद विभाग से तत्काल सहायता नहीं मिल सकी, जिससे अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई. ऐसे समय में नगर प्रधान सहायक निरंजन सिंह ने इंसानियत दिखाते हुए अपनी ओर से 5 हजार रुपये की मदद की, वहीं साथी सफाईकर्मियों ने आपस में सहयोग कर 3,150 रुपये जुटाकर परिवार को सौंपे, कर्मचारियों ने कहा कि शहर को साफ रखने वाले कर्मियों के निधन पर भी विभाग की ओर से समय पर सहायता न मिलना गंभीर और चिंताजनक स्थिति है.
शोक सभा में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को दी गई श्रद्धांजलि
आज आयोजित इस विशाल शोक सभा में मुख्य रूप से हजारीबाग के महापौर अरविंद राणा, यूनियन अध्यक्ष विवेक कुमार वाल्मीकि, नगर प्रधान सहायक निरंजन सिंह, प्रबंधक सतीश कुमार और हेड जमादार दीपक गोस्वामी उपस्थित थे. इनके साथ ही चोमू राम, गौतम राम, रविकांत कुमार सिंह, चंदन ठाकुर, मुकेश सिंह, अहमद रजा, सूरज राम एवं भारी संख्या में नगर निगम के दैनिक और स्थाई सफाई कर्मचारी उपस्थित रहे. सभी गणमान्य लोगों और सहकर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की और अखिल भारतीय मजदूर संगठन नगर निगम यूनियन हजारीबाग के बैनर तले संकल्प लिया कि जब तक सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था के नियमों में सुधार नहीं होगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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