News Wave Desk:हीट स्ट्रेस वह स्थिति है जब हमारा शरीर अत्यधिक गर्मी को सहन नहीं कर पाता और अंदरूनी तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है. आसान शब्दों में, जब शरीर का ओवरहीट हो जाता है तब इसे कहते हैं हीट स्ट्रेस.

हीट स्ट्रेस क्यों होता है?

हमारा शरीर पसीने से खुद को ठंडा रखता है. लेकिन जब तापमान 40°C से ऊपर हो जाता हैं तो उमस ज्यादा हो जाता है और जब हम धूप में भारी काम करते है या पानी कम पीते है, तो पसीना सूख नहीं पाता है. शरीर ठंडा नहीं हो पाता और हीट अंदर जमा होने लगती है.टाईट कपड़े और शराब भी खतरा बढ़ाते हैं.
हीट स्ट्रेस के तीन स्तर

- हीट क्रैम्प्स: सबसे हल्का स्तर. मांसपेशियों में तेज ऐंठन, बहुत पसीना आता है.
- हीट एक्जॉशन: खतरनाक स्थिति. चक्कर आना, उल्टी, तेज सिरदर्द, कमजोरी, त्वचा ठंडी-चिपचिपी हो जाना और नब्ज तेज चलना इसके लक्षण हैं.
- हीट स्ट्रोक: जानलेवा इमरजेंसी. बुखार 104°F से ऊपर, त्वचा सूखी-गर्म, बेहोशी या उल्टा-सीधा बोलना. इसमें दिमाग और किडनी डैमेज हो सकते हैं. तुरंत 108 पर कॉल करें अधिक जानकारी के लिए.
किससे खतरा ज्यादा है?

बाहर काम करने वाले मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिस, बच्चे, बुजुर्ग और मोटापे से ग्रस्त लोगों को हीट स्ट्रेस का खतरा सबसे ज्यादा होता है. मई-जून में दोपहर 12 से 4 बजे बाहर निकलना सबसे खतरनाक है.
बचाव के उपाय

दोपहर में बाहर निकलने से बचें. हर 20 मिनट में पानी, नींबू पानी या ORS पिएं. हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनें और टोपी या छाते का इस्तेमाल करें. भारी काम सुबह या शाम को करें और बीच-बीच में छांव में आराम करें. दिन में दो बार ठंडे पानी से नहाएं.
इमरजेंसी में क्या करें?

मरीज को छांव में लिटाएं, कपड़े ढीले करें, गर्दन, और सिर पर ठंडी पट्टी रखें. पंखा चलाएं. होश में हो तो थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाएं.
लू लगना ही हीट स्ट्रेस है. सावधानी ही सुरक्षा है.
ALSO READ: गुस्से को कंट्रोल करने के असरदार तरीके
