हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: लॉ रिसर्चर भी करा सकेंगे स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट, लेकिन सेवा अवधि तक सस्पेंड रहेगा लाइसेंस

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने वकालत की डिग्री पूरी करने के बाद अदालत में लॉ रिसर्चर या रिसर्च एसोसिएट के...

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विनीत आभा उपाध्याय 

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने वकालत की डिग्री पूरी करने के बाद अदालत में लॉ रिसर्चर या रिसर्च एसोसिएट के रूप में काम करने वाले युवाओं के पक्ष में बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट बार काउंसिल (JSBC) को निर्देश दिया है कि वह उस लॉ ग्रेजुएट को एनरोलमेंट सर्टिफिकेट जारी करे जिसे लॉ रिसर्चर के पद पर कार्यरत होने के कारण बार काउंसिल ने पंजीकरण देने से इनकार कर दिया था. 

सेवा के दौरान निलंबित रहेगा वकालत का लाइसेंस

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि लॉ रिसर्चर के रूप में काम करने की अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थी का वकालत का लाइसेंस निलंबित रहेगा और सेवा समाप्त होने के बाद वह स्वतः सक्रिय हो जाएगा. यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आनंद सेन ने की कोर्ट ने दिया है. इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता ने कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद झारखंड हाईकोर्ट में लॉ रिसर्चर-रिसर्च एसोसिएट के रूप में ज्वाइन किया था. इसके बाद उसने अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए झारखंड स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया.

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बार काउंसिल ने नौकरी का हवाला देकर ठुकराया था आवेदन

लेकिन स्टेट बार काउंसिल ने उसके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह वर्तमान में एक लॉ रिसर्चर के रूप में हाईकोर्ट से मानदेय प्राप्त कर रही है इसलिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के तहत उसे एक वकील के रूप में पंजीकृत नहीं किया जा सकता.काउंसिल का तर्क था कि कोई भी व्यक्ति लाभ के पद पर रहते हुए या नौकरी करते हुए वकील के रूप में नामांकित नहीं हो सकता.बार काउंसिल के इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. 

सैकड़ों लॉ रिसर्चर्स को मिलेगा सीधा फायदा

हाईकोर्ट के इस फैसले से झारखंड के उन सैकड़ों लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत मिली है जो हाईकोर्ट या अन्य न्यायिक संस्थाओं में लॉ रिसर्चर के रूप में काम कर रहे हैं या भविष्य में करना चाहते हैं. अब वे बिना किसी डर के रिसर्च एसोसिएट के रूप में काम कर सकेंगे क्योंकि उनका स्टेट बार काउंसिल में सीनियरिटी और एनरोलमेंट सुरक्षित रहेगा और वे अपनी सेवा अवधि पूरी होने के तुरंत बाद सीधे कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर सकेंगे.

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