News Wave Desk:बांध का परिचय और महत्व रांची से करीब 35 किलोमीटर दूर सुवर्णरेखा नदी पर स्थित गेटलसुद बांध, जिसे रुक्का बांध भी कहते हैं, इसे 1971 में बनाया गया था. यह छोटा नागपुर पठार के खूबसूरत दृश्यों के बीच बना है . रांची, हटिया तथा आसपास के खेतों और उद्योगों के लिए प्रमुख जलस्रोत हैं। 717 वर्ग किमी जलग्रहण क्षेत्र और 1,954 फीट जलस्तर वाला यह बांध अब एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी बन गया है.

क्यों जाएं गेटलसुद बांध?

यहाँ का शांत और विशाल जलाशय, खुला आसमान और हरियाली आपको शहर की भीड़ से दूर सुकून का एहसास दिलाता हैं. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का नजारा बेहद मनमोहक होता है. फोटोग्राफी और सौंदर्य शौकीनों के लिए यह एक परफेक्ट स्पॉट है. बांध के एक किनारे पर फैली हरी घास और छायादार पेड़ इसे परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए आदर्श जगह बनाती हैं. यहां की खुली जगह, ठंडी हवा और सुंदर दृश्य एक यादगार दिन का वादा करते हैं.
आसान पहुंच और आस-पास के झरने
रांची से यहां तक पहुंचना आसान है सड़कें अच्छी हैं और ड्राइव करीब एक घंटे की है. खास बात यह है कि रास्ते में जोन्हा, सीता और हुंडरू जैसे झरने भी आते हैं, जिन्हें एक ही दिन में देखा जा सकता है. मानसून में ये झरने अपनी पूरी खूबसूरती पर होते हैं.
यात्रा के सुझाव

गेटलसुद बांध घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है. मानसून में हरियाली और झरनों का मज़ा दोगुना हो जाता है. बांध पर होटल नहीं हैं, इसलिए रांची में रुकना बेहतर है.यहाँ हर बजट के होटल और होमस्टे उपलब्ध हैं. यात्रा में कैमरा और चादर साथ ले जाएं, और सूर्यास्त का नज़ारा मिस न करें.
गेटलसुद बांध में प्रकृति और शांति दोनों का संगम है .इस ट्रिप का अनुभव जरूर लें.
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