झारखंड पुलिस : इंडक्शन कोर्स और ट्रेनिंग करने के बाद भी नहीं मिल रहा प्रमोशन

Dheeraj Singh Ranchi : दो दो बार इंडक्शन कोर्स करने और ट्रेनिंग के बाद भी राज्य पुलिसकर्मियों को प्रमोशन नहीं मिल रहा...

Dheeraj Singh

Ranchi : दो दो बार इंडक्शन कोर्स करने और ट्रेनिंग के बाद भी राज्य पुलिसकर्मियों को प्रमोशन नहीं मिल रहा है. जिसके कारण पुलिसकर्मियों में काफी निराशा है. इनमें से कई पुलिसकर्मी ऐसे है जो इंडक्शन कोर्स और ट्रेनिंग के बाद भी बिना प्रमोशन पाए रिटायर्ड होने वाले है. पुलिसकर्मियों की मानें तो विभागीय लापरवाही के कारण पुलिस महकमे के निचले स्तर के कर्मियों में भारी आक्रोश और निराशा है. पुलिसकर्मियों को अगले पद पर प्रोन्नति के लिए निर्धारित इंडक्शन कोर्स और ट्रेनिंग पास करनी होती है. प्रभावित पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्होंने विभाग के आदेश पर एक नहीं बल्कि दो-दो बार कठिन ट्रेनिंग और परीक्षाएं पास की. इसके बावजूद फाइलों की सुस्ती के कारण उनकी प्रोन्नति की प्रक्रिया को लटकाएं रखा गया. जिसके कारण पुलिसकर्मी बिना किसी वित्तीय और पदोन्नति लाभ के ही सेवामुक्त हो गए.

रिटायर होने वाले पुलिसकर्मी

झारखंड राज्य में ऐसे कई पुलिस कर्मी हैं जो दो दो बार इंडक्शन कोर्स और ट्रेनिंग पूरा कर चुके है. लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं मिल रहा है. ऐसे पुलिसकर्मियों में लालबाबू तिवारी, रामानुज प्रसाद सिंह, वीरेंदर सिंह, अजय झा, सीमा कुमारी , रमाकांत झा, सुबोध प्रसाद सिंह, बृजकिशोर सिंह, शैलेश यादव आदि सैकड़ों पुलिसकर्मी हैं जो रिटायर होने के कगार पर हैं. वहीं, इनमें से कुछ रिटायर्ड हो गए हैं.

योग्यता सूची में शीर्ष पर होते हुए भी बगैर लाभ के रिटायर हुए

पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पुलिस के विभिन्न जिलों और बटालियन से सैकड़ों ऐसे आरक्षी और प्रधान आरक्षी रिटायर्ड हो चुके हैं, जो योग्यता सूची में शीर्ष पर थे. पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि समय पर प्रोन्नति समिति की बैठक न होना और मुख्यालय स्तर पर फाइलों का समय पर निष्पादन न होना इसका मुख्य कारण है. कई कर्मी तो सेवानिवृत्ति के आखिरी महीने तक मुख्यालय का चक्कर काटते रहे, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला.

एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इस पर आपत्ति जताई है. एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि एक तरफ राज्य में अधिकारियों के पदों पर तुरंत फैसले लिए जाते हैं. वहीं दूसरी तरफ जमीन पर चौबीस घंटे ड्यूटी करने वाले जवानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. दो बार इंडक्शन कोर्स कराने के बाद भी प्रमोशन न देना कर्मियों के मानवाधिकारों और उनके करियर के साथ खिलवाड़ है.

मनोबल पर पड़ रहा है बुरा असर

इस प्रशासनिक विफलता का सीधा असर वर्तमान में कार्यरत पुलिसकर्मियों के मनोबल पर पड़ रहा है. जवानों का कहना है कि जब दो बार ट्रेनिंग करने के बाद भी समय पर हक नहीं मिलना है, तो ऐसी कठिन ट्रेनिंग का क्या फायदा. इस विसंगति के कारण पुलिसकर्मियों को न सिर्फ सामाजिक प्रतिष्ठा का नुकसान हुआ है. बल्कि उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर भी इसका सीधा आर्थिक असर पड़ा है. अब प्रभावित कर्मी और उनके संगठन इस मामले को लेकर सरकार और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं.

 

 

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