Report: Santosh Shrivastva

Palamu: चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर कोशियार पंचायत के रामपुर मेला टांडी में कल जमीनी विवाद ने एक भयानक रूप ले लिया. दो पक्षों के बीच हुई इस हिंसक लड़ाई में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए मेदनी राय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही रामपुर गांव में भारी तनाव का माहौल है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया है.
घटना के 18 घंटे बाद प्रशासनिक अमला पीड़ित परिवार को सहायता पहुंचाने गांव पहुंचा
इस पूरी घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक सजगता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया होता या अधिकारियों ने इस जमीनी विवाद को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज एक बेकसूर की जान नहीं जाती. हमेशा की तरह इस बार भी इतनी बड़ी वारदात होने और एक घर का चिराग बुझने के बाद ही प्रशासन की नींद खुली है. घटना के लगभग 18 घंटे बीत जाने के बाद आज प्रशासनिक अमला पीड़ित परिवार को सहायता पहुंचाने गांव पहुंचा. मृतक के दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक बाद अंचलाधिकारी (CO) चन्द्रशेखर तिवारी की अगुवाई में प्रखंड सह अंचल कार्यालय की टीम रामपुर गांव पहुंची. अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और मौके पर ही कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए तत्काल राहत उपलब्ध कराई.
पीड़ित परिवार को दिया गया 50 किलो चावल और ₹15,000 की नकद राशि
प्रशासन की तरफ से पीड़ित परिवार को सहायता के रूप में तत्काल 50 किलो चावल और ₹15,000 की नकद राशि सौंपी गई. इसके साथ ही, मृत्यु प्रमाण पत्र, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया भी मौके पर ही शुरू कर दी गई. पीड़ित परिवार को रहने के लिए अंबेडकर आवास और नया राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों ने उनके जरूरी दस्तावेज और बैंक पासबुक भी जमा कर लिए हैं. इस मौके पर सीओ के साथ जीपीएस सूर्य देव राम, पंचायत सेवक राहुल कुमार, राजस्व कर्मचारी संतोष उरांव और आवास समन्वयक मुस्तैद रहे.
जिले में कई जमीनी विवाद के मामले लंबित पड़े
हालांकि, इस प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर इस तरह की दुर्दशा होने के बाद ही अधिकारी सिर्फ सहायता और आश्वासन लेकर क्यों पहुंचते हैं. जिले में न जाने ऐसे कितने ही जमीनी विवाद के मामले लंबित पड़े होंगे, जो किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं. जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन इस घटना से सबक ले और क्षेत्र की इस तरह की हर संवेदनशील समस्या का समाधान किसी बड़ी वारदात से पहले ही सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में फिर किसी परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े. दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.
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