सीएम हेमंत सोरेन का मिशन झारखंड 2026: बजट प्रबंधन और राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति पर दें विशेष ध्यान, प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए बायोमैट्रिक प्रणाली लागू करने पर जोर

Ranchi: झारखंड में अब सिर्फ प्रशासनिक नीतियां नहीं बनेंगी, बल्कि उन नीतियों के क्रियान्वयन की रफ्तार और सरकारी खजाने की सेहत सीधे...

Ranchi: झारखंड में अब सिर्फ प्रशासनिक नीतियां नहीं बनेंगी, बल्कि उन नीतियों के क्रियान्वयन की रफ्तार और सरकारी खजाने की सेहत सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय की रडार पर होगी. राज्य की वित्तीय व्यवस्था को नए युग की प्रशासनिक पारदर्शिता से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. सोमवार को झारखंड मंत्रालय में वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह जनता तक विकास पहुंचाने का जरिया है; इसलिए ‘बजट प्रबंधन और राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति’ में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

ओडिशा-छत्तीसगढ़ को पछाड़ खनन राजस्व में अव्वल बना सूबा

इस बैठक का सबसे बड़ा और नया ‘टेकअवे’ यह रहा कि झारखंड ने खनिज संपदा के दोहन और उससे मिलने वाले राजस्व प्रबंधन में अपने चिर-प्रतिद्वंदी पड़ोसी राज्यों—ओडिशा और छत्तीसगढ़ को पीछे छोड़ दिया है. लेकिन मुख्यमंत्री इस सफलता पर थमने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब खजाने की इस मजबूती का इस्तेमाल राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं को पहुंचाने में होगा, जिसके लिए नौकरशाही को अपना ढर्रा बदलना होगा.

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पड़ोसी राज्यों को पछाड़ा: खनन राजस्व में झारखंड बना ‘सुल्तान’

बैठक के दौरान विभिन्न वित्तीय वर्षों के जो आंकड़े टेबल पर रखे गए, वे चौंकाने वाले और झारखंड के लिए बेहद उत्साहजनक थे. खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित प्रबंधन और पारदर्शी नीतियों के कारण झारखंड का खनन राजस्व, पड़ोसी राज्य ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में पहुंच चुका है. मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संतोष तो जताया, लेकिन साथ ही अधिकारियों को चेताया भी कि इस ‘सकारात्मक स्थिति’ को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है.

अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस

सीएम ने निर्देश दिया कि माइनिंग सेक्टर में किसी भी तरह की लीकेज या अवैध खनन बर्दाश्त नहीं होगी. अब खनन क्षेत्रों की निगरानी पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से की जाएगी.

दफ्तरों में अनिवार्य होगी बायोमेट्रिक प्रणाली

इस समीक्षा बैठक का दूसरा सबसे बड़ा और कड़ा पहलू ‘प्रशासनिक जवाबदेही’ से जुड़ा था. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फाइलों की सुस्ती और अधिकारियों की लेटलतीफी का दौर अब खत्म होना चाहिए. पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब पूरे राज्य में बायोमेट्रिक और ई-गवर्नेंस प्रणाली को पूरी सख्ती से लागू करने जा रही है. सीएम ने कहा कि सभी संबंधित कार्यालयों और विभागों में उपस्थिति से लेकर कार्यप्रणाली से जुड़ी हर प्रक्रिया में बायोमेट्रिक व्यवस्था को अनिवार्य किया जाए. जनता के पैसे का हिसाब और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए. इस कदम के बाद अब सचिवालय से लेकर जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को समय पर दफ्तर आना होगा और हर फाइल के मूवमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड रखना होगा.

‘साझा दृष्टिकोण’ से भागेगी विकास की गाड़ी

अक्सर देखा जाता है कि सरकार की बड़ी योजनाएं विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण दम तोड़ देती हैं. सीएम ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ‘समन्वय की कमी’ नहीं होनी चाहिए. सभी विभागों को अब एक ‘साझा दृष्टिकोण’ के साथ आगे बढ़ना होगा. मुख्यमंत्री का मानना है कि जब विभाग आपस में मिलकर काम करेंगे, तो संसाधनों की बर्बादी रुकेगी, समय बचेगा और विकास कार्यों की गति दोगुनी हो जाएगी.

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टैक्स वंचना पर लगेगी लगाम

बैठक के दूसरे सत्र में वाणिज्य-कर विभाग की गहन समीक्षा की गई. यहां मुख्यमंत्री का पूरा फोकस राज्य के आंतरिक वित्तीय स्रोतों को मजबूत करने पर था. जीएसटी अनुपालन, वैट, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य राज्य स्तरीय करों की वसूली को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को इतना सरल और पारदर्शी बनाया जाए कि वे खुद आगे बढ़कर टैक्स दें, लेकिन जो जानबूझकर टैक्स चोरी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

केंद्र के अनुदान और स्थापना व्यय की पाई-पाई का हिसाब

वित्त विभाग की समीक्षा के दौरान राज्य के आय-व्यय की समग्र स्थिति पर बिंदुवार चर्चा की गई. बैठक में बजट आकलन, प्राक्कलन, स्थापना व्यय, पूंजीगत प्राप्तियां तथा भारत सरकार से प्राप्त होने वाले सहायता अनुदान के प्रभावी उपयोग पर विशेष रणनीति बनाई गई. मुख्यमंत्री ने वित्त सचिव को निर्देश दिया कि केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि का समय पर और शत-प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी फंड तकनीकी कारणों से वापस न जाए. राज्य के वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन इस तरह हो कि स्थापना व्यय (सैलरी, पेंशन आदि) के साथ-साथ विकास कार्यों के लिए फंड की कभी कमी न पड़े. बैठक में मुख्य रूप से वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, वित्त सचिव प्रशांत कुमार और वाणिज्यकर सचिव अमित कुमार मौजूद रहे.

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