News Wave Desk : देशभर के स्कूलों में अब बच्चों की मानसिक सेहत यानी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. नई शिक्षा नीतियों और विशेषज्ञों की सलाह के बाद कई स्कूलों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों के तनाव, चिंता और मानसिक दबाव को कम करना है.

बच्चों में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा 
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, प्रतियोगिता और करियर की चिंता के कारण बच्चों में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है. कई छात्र कम उम्र में ही एंग्जाइटी , स्ट्रेस और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इसी को देखते हुए अब स्कूलों में काउंसलिंग सेशन, मोटिवेशनल एक्टिविटी और इमोशनल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं. नई पहल के तहत स्कूलों में बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उनकी भावनाओं, व्यवहार और मानसिक स्थिति को भी समझने की कोशिश की जाएगी.
परीक्षा अंक से ज्यादा मानसिक कल्याण” को महत्व देने की चर्चा बढ़ रही 
कुछ स्कूलों में “’हैप्पी क्लासरूम”, मेडिटेशन सेशन और तनाव-मुक्त होकर सीखना जैसी गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं.शिक्षाविदों का मानना है कि अगर बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, तो उनका आत्मविश्वास, पढ़ाई में प्रदर्शन और सामाजिक व्यवहार भी मजबूत होगा. यही वजह है कि अब स्कूलों में “परीक्षा अंक से ज्यादा मानसिक कल्याण” को महत्व देने की चर्चा बढ़ रही है. डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों को खुलकर बात करने का माहौल, पर्याप्त आराम और परिवार का सहयोग मिलना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञ मानते हैं कि सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से भविष्य में बड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है.
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