Ranchi: झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और युवाओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है. आइसा और आरवाईए ने राज्य सरकार की नई शिक्षा नीति, क्लस्टर सिस्टम, बढ़ती फीस और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ 29 मई को राज्यव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है. संगठनों ने इसे “शिक्षा बचाओ और भविष्य बचाओ आंदोलन” बताया है.

महंगी और निजी हो रही है शिक्षा
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार उच्च शिक्षा को धीरे-धीरे निजी और महंगा बना रही है. कॉलेजों को क्लस्टर सिस्टम में बांटने, शिक्षकों के पद घटाने और सीटें कम करने की तैयारी से गरीब और ग्रामीण छात्रों के लिए पढ़ाई मुश्किल हो जाएगी. खासकर महिला छात्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की बात कही गई है.
सेल्फ-फाइनेंस मॉडल पर उठे सवाल
आइसा और आरवाईए ने कहा कि अब शिक्षा को अधिकार नहीं, बल्कि “कमाई का जरिया” बनाया जा रहा है. रेगुलर कोर्स की जगह सेल्फ-फाइनेंस मॉडल को बढ़ावा देकर छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है. बीएड और एमएड कॉलेजों के रांची विश्वविद्यालय में विलय का हवाला देते हुए संगठनों ने कहा कि जिन कोर्सों की फीस पहले हजारों में थी, अब वही लाखों में पहुंच रही है.
पेपर लीक से युवाओं में बढ़ रहा अविश्वास
छात्र नेताओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया. NEET, NET और SSC जैसी परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि मेहनत करने वाले छात्र अब सिस्टम पर भरोसा खोते जा रहे हैं. अभ्यर्थियों के बीच मानसिक तनाव और असुरक्षा लगातार बढ़ रही है. CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर भी छात्र संगठनों ने सवाल उठाए. उनका कहना है कि मूल्यांकन में तकनीकी गड़बड़ियां और रिजल्ट में कथित अनियमितताओं ने छात्रों की परेशानी बढ़ा दी है.
