Ranchi: झारखंड में लंबे समय से फैला लाल आतंक अब अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच चुका है. 22 मई को चलाए गए ‘ऑपरेशन नवजीवन’ के तहत इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण हुआ, जब 27 नक्सलियों और उग्रवादियों ने पुलिस मुख्यालय में हथियार डाल दिए. इसके अगले ही दिन 22 मई को राज्य सरकार ने शेष बचे इनामी नक्सलियों की नई सूची जारी कर तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी.

महज 36 मोस्ट वांटेड नक्सली और उग्रवादी ही सक्रिय
इस रिपोर्ट के मुताबिक अब राज्य के जंगलों में महज 36 मोस्ट वांटेड नक्सली और उग्रवादी ही सक्रिय बचे हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने निर्णायक रणनीति बना ली है. अब सुरक्षा बलों ने इनके विरुद्ध मिशन क्लीन की तैयारी शुरू कर दी है. सबसे बड़े सरेंडर के बाद अब पुलिस और केंद्रीय बल पूरी ताकत से अंतिम अभियान में जुट गए हैं.
नई सूची से स्पष्ट है कि सबसे बड़ा झटका प्रतिबंधित माओवादी संगठन को लगा है:
– माओवादी : 30
– टीपीसी : 2
– जेजेएमपी : 2
– पीएलएफआई : 2
माओवादी ढांचा लगभग टूट चुका है और अब उसके शीर्ष कमांडर ही बचे हैं. इन 36 फरार नक्सलियों उग्रवादियों पर सरकार ने करोड़ों का इनाम घोषित कर रखा है. इसमें 1 करोड़ के 2 नक्सलियों (मिसिर बेसरा, असीम मंडल) के अलावा 25 लाख के 2, 15 लाख रुपये के 6, 10 लाख रुपये के 9, 5 लाख रुपये के 9, 2 लाख रुपये के 4 और 1 लाख रुपये के 4 इनामी बच गए है.
एक के बाद टूटता चला गया इनका नेटवर्क
27 अप्रैल 2026 को सारंडा और कोल्हान के जंगलों में चलाए गए बड़े सर्च ऑपरेशन ने इस बदलाव की नींव रखी. इस दौरान टॉप कमांडरों के स्ट्राइक स्क्वाड को तोड़ दिया गया. सप्लाई और कम्युनिकेशन लाइन ध्वस्त हुई. निचले स्तर के कैडर में भय और असंतोष बढ़ा. इसी दबाव का नतीजा रहा कि 21 मई को एक साथ 25 माओवादी और 2 जेजएमपी उग्रवादियों ने सरेंडर किया, जिनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. लगातार सुरक्षा बलों का दबाव, संगठन के अंदर शोषण और असंतोष, संसाधनों की कमी, स्थानीय समर्थन में गिरावट, इन कारणों से निचली कमान पूरी तरह बिखर चुकी है.
