Ranchi: झारखंड को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कवायद शुरू हो गई है. राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग के तहत संचालित झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जरेडा) ने राज्य में बिजली की बर्बादी रोकने, डिमांड साइड मैनेजमेंट (डीएसएम) को मजबूत करने और जलवायु अनुकूल पहलों को लागू करने के लिए कमर कस ली है. इसके तहत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक ऊर्जा संरक्षण योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए एजेंसियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

क्या है योजना और कितनी आएगी लागत?
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य एनर्जी इफीशिएंसी फर्स्ट प्रिंसिपल (ऊर्जा दक्षता प्रथम सिद्धांत) के तहत बिजली की खपत को नियंत्रित करना और क्षमता निर्माण (के साथ-साथ व्यापक परियोजना रिपोर्ट तैयार करना है. इस पूरे काम के लिए दो करोड़ तैंतीस लाख अट्ठावन हजार बीस रुपये का अनुमानित बजट तय किया गया है.चुनी गई एजेंसी को 12 महीनों के भीतर इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करना होगा.
