Ranchi: झारखंड के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति अनुबंध पर हुई थी. उसमें अब 1800 सहायक पुलिसकर्मी बच गए हैं. उनका अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त हो जाएगा. उन 1800 सहायक पुलिसकर्मियों ने अनुबंध बढ़ाने, आरक्षी संवर्ग में समायोजित करने और नियमित करने की मांग को लेकर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को मांग पत्र सौंपा है. वहां उन्हें केवल आश्वासन मिला है.

वर्ष 2017 में पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा, चतरा, पलामू, गढ़वा, दुमका, लातेहार, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर एवं गिरिडीह सहित कुल 12 जिलों में सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली हुई थी. सहायक पुलिसकर्मियों को हमेशा अनुबंध बढ़ाने के लिए सरकार से गुहार लगानी पड़ती है. झारखंड सहायक पुलिस प्रदेश एसोसिएशन के सचिव विवेकानंद गुप्ता ने कहा कि जिला बल के जवानों की तरह उनसे 24 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन उनके वेतन और भत्ते 20 हजार रुपये के अनुरूप भी नहीं हैं.
उनका कहना है कि सहायक पुलिसकर्मियों का वेतन मात्र 13 हजार रुपये है. उनसे हर काम जिला बल के जवानों की तरह लिया जाता है. इतना ही नहीं, एलआरपी और गश्त में भी उन्हें लगाया जाता है. कार्यालय का काम भी लिया जाता है. पर्व-त्योहार के समय ट्रैफिक ड्यूटी में भी लगाया जाता है. सारा काम जिला बल के जवानों की तरह लिया जाता है, लेकिन सरकार उनके हित में कुछ नहीं सोचती.
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छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायी करने की मांग
सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन्हें छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायी किया जाए. झारखंड राज्य के गठन के समय ही छत्तीसगढ़ का भी गठन हुआ था. वहां डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स संवर्ग गठित कर सहायक आरक्षकों को स्थायी कर दिया गया है. उनका वेतनमान (5200-20200) लेवल-3 ग्रेड पे के अनुरूप ग्रेड पे 2000 निर्धारित किया गया है. इतना ही नहीं, राज्य के होमगार्डों का भी वेतन 33 हजार रुपये कर दिया गया है.
नौ सूत्री मांग भी ज्ञापन में शामिल
सहायक पुलिसकर्मियों ने जो ज्ञापन वित्त मंत्री को सौंपा है, उसमें नौ मांगें शामिल हैं. इसमें जिला बल के पुलिसकर्मियों के अनुरूप जीपीएफ, राज्य सरकार के अधीन कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के अनुरूप वेतनमान, राज्य के पुलिस कक्षपाल, सिपाही, गृहरक्षा वाहिनी और उत्पाद सिपाही भर्ती नियमावली में 10 प्रतिशत आरक्षण सहित नौ सूत्री मांगें शामिल हैं.
