सरायकेला: नौकरी न मिलने पर शिक्षित युवक ने शुरू की बागवानी और पोल्ट्री फार्म, 4 लोगों को दिया रोजगार

Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के रसुनिया पंचायत अंतर्गत माझीडीह टोला में एक शिक्षित युवक ने बेरोजगारी को मात देकर स्वरोजगार की नई इबारत...

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खिरोद महतो

Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के रसुनिया पंचायत अंतर्गत माझीडीह टोला में एक शिक्षित युवक ने बेरोजगारी को मात देकर स्वरोजगार की नई इबारत लिखी है. सरकारी नौकरी की उम्मीद छोड़ सुखदेव महतो ने बैंक से केसीसी लोन लेकर बागवानी और पोल्ट्री फार्म शुरू किया. आज वह खुद के साथ चार अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहा है. खास बात यह है कि यह इलाका जंगली हाथियों से प्रभावित है, फिर भी सुखदेव ने हिम्मत नहीं हारी.

पेपर लीक से टूटी नौकरी की आस, खेती बना सहारा

माझीडीह निवासी बद्धनाथ महतो के पुत्र सुखदेव महतो स्नातक पास हैं. सुखदेव बताते हैं कि कई बार सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दी, लेकिन हर बार पेपर लीक की बात कहकर परिणाम टाल दिया गया. आखिरकार थक-हारकर उन्होंने पूर्वजों की जमीन पर ही कुछ करने की ठानी.

बैंक लोन से शुरू किया बागवानी और पोल्ट्री फार्म

अक्टूबर 2022 में सुखदेव ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड लोन लेकर काम शुरू किया. उन्होंने अपने खेत में केसर, दशहरी, आम्रपाली, मालदा जैसी उन्नत किस्मों के आम के पौधे लगाए. साथ ही नींबू, अमरूद और पपीता के पौधे भी रोपे. आज इन पौधों की ऊंचाई चार से पांच फीट हो गई है और फल भी भरपूर फल लग रहे हैं.

बागवानी के साथ ही सुखदेव ने फार्म हाउस में पोल्ट्री फार्म भी शुरू किया. गर्मी के सीजन में वह एक बार में तीन से पांच हजार चूजे पालते हैं. देखभाल में परिवार के सदस्य भी हाथ बंटाते हैं.

चांडिल स्टेशन और बाजार में बेचते हैं उत्पाद

सुखदेव अपने फार्म के फल और पोल्ट्री उत्पादों की मार्केटिंग खुद करते हैं. आम, पपीता, अमरूद को चांडिल स्टेशन, चांडिल बाजार और आसपास के हाट-बाजारों में ले जाकर बेचते हैं. इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है.

हाथियों के खतरे के बीच कर रहे खेती

माझीडीह टोला जंगली हाथियों से प्रभावित क्षेत्र है. हर साल हाथी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके बावजूद खिरोद ने हार नहीं मानी. उन्होंने फार्म के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाने की योजना बनाई है. सुखदेव कहते हैं, “जोखिम तो है, लेकिन मेहनत से सब मुमकिन है. सरकार युवाओं को खेती-बागवानी के लिए और मदद दे तो पलायन रुकेगा.”

खिरोद की सफलता अब इलाके के दूसरे बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है. कृषि विभाग ने भी उनके मॉडल को सराहा है और अन्य किसानों को प्रशिक्षण के लिए उनके फार्म पर भेजने की बात कही है.

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