हजारीबाग में ब्राउन शुगर का बढ़ता नेटवर्क, युवाओं का भविष्य खतरे में

Hazaribagh: कभी अपनी शैक्षणिक पहचान, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध हजारीबाग अब एक नई और गंभीर चुनौती से जूझ रहा...

हजारीबाग में ब्राउन शुगर का बढ़ता नेटवर्क
हजारीबाग में ब्राउन शुगर का बढ़ता नेटवर्क

Hazaribagh: कभी अपनी शैक्षणिक पहचान, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध हजारीबाग अब एक नई और गंभीर चुनौती से जूझ रहा है. शहर में ब्राउन शुगर का फैलता नेटवर्क युवाओं के भविष्य पर गहरा खतरा बनकर उभर रहा है. हालात ऐसे हैं कि 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवक तेजी से इस नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं. चिंता की बात यह है कि कई युवा केवल नशे के उपभोक्ता नहीं, बल्कि इसके सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा भी बनते जा रहे हैं.

सुनसान इलाकों में फल-फूल रहा कारोबार

स्थानीय लोगों के अनुसार शहर के कई ऐसे स्थान हैं, जहां दिनभर संदिग्ध गतिविधियां देखी जाती हैं. बुढ़वा महादेव तालाब के आसपास, कन्हरी हिल क्षेत्र, झील के समीप जेल अधीक्षक आवास के पीछे का इलाका, परिषद भवन के बगल की गली तथा स्वर्ण जयंती पार्क जाने वाली सड़क को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं. लोगों का आरोप है कि इन स्थानों पर खुलेआम ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री होती है और नशे के आदी युवक घंटों तक यहां मंडराते रहते हैं. शाम ढलते ही कई इलाकों का माहौल और अधिक संदिग्ध हो जाता है.

स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक पहुंचा नशे का जाल

शहरवासियों का कहना है कि यह समस्या अब सीमित दायरे तक नहीं रह गई है. स्कूल और कॉलेज के छात्रों के अलावा टोटो और टेंपो चालक जैसे युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं. इससे न केवल युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके परिवार भी आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि नशे की लत कई युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल रही है. आसान कमाई के लालच में कुछ युवक पैडलर बनकर इस नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहे हैं.

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पुलिस गश्ती पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में नशे के कारोबार की चर्चा है, वहां से नियमित रूप से पुलिस की गाड़ियां गुजरती हैं. इसके बावजूद कारोबार पूरी तरह थमता नजर नहीं आता. इसी वजह से पुलिस की निगरानी व्यवस्था और गश्ती अभियान की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि पुलिस समय-समय पर कार्रवाई करते हुए ब्राउन शुगर तस्करों को गिरफ्तार करती रही है और नशीले पदार्थों की बरामदगी भी होती रही है. इसके बावजूद नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है.

कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर सामाजिक संकट

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि ब्राउन शुगर का बढ़ता प्रचलन अब केवल पुलिस या कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गया है. यह एक सामाजिक और पारिवारिक संकट का रूप ले चुका है. यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

क्या कहते हैं शहरवासी

शहर के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि नशे के हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां नियमित छापेमारी, निगरानी और जागरूकता अभियान चलाए जाएं. उनका मानना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामाजिक भागीदारी और पुनर्वास की दिशा में भी ठोस पहल जरूरी है.

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