राज्य और केंद्र के बीच JJM 2.0 पर MOU साइन: CM सोरेन ने उठाए 6,500 करोड़ के बकाये और NOC के मुद्दे

Ranchi: झारखंड में हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया गया....

Ranchi: झारखंड में हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया गया. जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. राजधानी रांची में आयोजित इस उच्च स्तरीय समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की. इस मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से उपस्थित रहे.समारोह की शुरुआत केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद के बीच गर्मजोशी से हुए अभिवादन के साथ हुई. बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के कई आला अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए.

 

CM हेमंत ने मजबूती से रखा झारखंड का पक्ष, मांगी 6,500 करोड़ की लंबित राशि

– बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रही पेयजल योजनाओं की प्रगति और उनके सामने आ रही चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया. मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु इस प्रकार है.

– वर्ष 2019-20 से अब तक राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कुल 24,635 करोड़ की लागत वाली विभिन्न पेयजल योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है. इसमें मल्टी विलेज स्कीम और सिंगल विलेज स्कीम पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

– मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र सरकार की ओर से कोई पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की गई है. उन्होंने स्वीकार्य केंद्रांश राशि को जल्द से जल्द रिलीज करने की मांग की.

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काम ज्यादा, अनुदान कम

राज्य सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि झारखंड में अब तक 55% परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि इसके मुकाबले केंद्र से केवल 46% अनुदान ही मिला है. मुख्यमंत्री ने लगभग 6,500 करोड़ की लंबित सहायता राशि को तुरंत जारी करने का आग्रह किया.

योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने मांग की कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से मिलने वाली अनापत्ति प्रमाण पत्र में तेजी लाई जाए.

जल सहियाओं के लिए मदद की अपील

राज्य सरकार अपने स्तर पर सिंगल विलेज स्कीम के संचालन के लिए हर गांव में ‘जल सहिया’ तैनात कर चुकी है, जिन्हें 2,500 रुपया प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है. इसके सतत संचालन के लिए केंद्र से सहयोग मांगा गया. साथ ही, भविष्य की सभी डीपीआर में सभी जरूरी घटकों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की बात कही गई.

केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के स्पष्टीकरण और कड़े निर्देश

राज्य की मांगों को सुनने के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने केंद्र सरकार की नीतियों को स्पष्ट किया और कुछ कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि योजनाओं के रेट्रोफिटिंग (नवीनीकरण) और नियमित संचालन व रखरखाव के लिए केंद्र सरकार अलग से कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी. इसके लिए राज्य सरकार को 16वें वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थानों को दिए गए अनुदान का इस्तेमाल करना होगा.

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