BREAKING – झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जस्टिस के भत्तों में बढ़ोतरी 

Ranchi: झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने राज्य के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जस्टिस के हित में एक...

Ranchi: झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने राज्य के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जस्टिस के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार द्वारा जारी नए संकल्प के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और सेवानिवृत्त जस्टिस को मिलने वाले घरेलू अनुसेवक भत्ते और अनुसचिवीय सहायता राशि में भारी वृद्धि की गई है. यह आदेश 1 जून से प्रभावी हो गया है. विशेष बात यह है कि यह सुविधाएं न्यायाधीशों की मृत्यु के उपरांत उनकी जीवित पत्नी या पति को भी अनुमन्य होंगी.

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में लिया गया फैसला

दस्तावेजों के अनुसार, यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा Contempt Petition(c) No. 425-426/2015 (न्यायमूर्ति वी०एस० दवे, प्रेसिडेंट, द एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ सुप्रीम कोर्ट एण्ड हाई कोर्ट बनाम कुसुमजीत सिद्धू एवं अन्य) में 18 फरवरी 2025 को पारित आदेश के आलोक में लिया गया है. शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही घरेलू सहायता भत्ता एवं दूरभाष प्रतिपूर्ति की तर्ज पर इसे सभी राज्यों में लागू करने का निर्देश दिया था.

 जाने किसे क्या मिलेगा भत्ता

– सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस को घरेलू नौकर,चालक भत्ता के रूप में 50 हजार रुपया प्रति माह मिलेगा. 

– सेवानिवृत्त जस्टिस को घरेलू नौकर,चालक भत्ता के रूप में 45 हजार रुपया प्रति माह मिलेगा.

– मोबाइल,लैंडलाइन, इंटरनेट सेवा, अनुसचिवीय सेवा और सुरक्षा सेवा भत्ता के रूप में  15 हजार रुपया प्रति माह मिलेगा.

– इस संकल्प की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तालिका में अंकित इस राशि में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी.

 लाभ उठाने के लिए अनिवार्य शर्तें

– सरकार ने इन भत्तों और सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें भी तय की हैं.

– यह लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो किसी अन्य उच्च न्यायालय या सरकार से ऐसी ही समान सुविधा का लाभ नहीं ले रहे हैं.

– यह सुविधाएं केवल उन्हीं सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जस्टिस को मिलेंगी जो सेवानिवृत्ति के बाद किसी अन्य न्यायालय, न्यायाधिकरण (Tribunal), आयोग या किसी अन्य सरकारी पद पर कार्यरत नहीं हैं.

– सेवानिवृत्त जस्टिस या उनके पति,पत्नी अपने विवेक से घरेलू नौकर या चालक का चयन खुद कर सकते हैं.

Read Also: ADG मनोज कौशिक पहुंचे गुमला, चार जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ की बैठक, दिए कई निर्देश

 स्थायी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति का नियम

सेवानिवृत्त जस्टिस चाहें तो झारखंड उच्च न्यायालय के दो चतुर्थ वर्गीय कर्मी अथवा एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी और एक चालक की सेवा के लिए अनुरोध कर सकते हैं. यदि उच्च न्यायालय द्वारा दो कर्मचारी उपलब्ध कराए जाते हैं, तो उन्हें तालिका में दिए गए घरेलू नौकर,चालक भत्ता’ (क्रम संख्या 01) का नकद लाभ नहीं मिलेगा.यदि केवल एक कर्मचारी उपलब्ध कराया जाता है, तो वे निर्धारित भत्ते की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति के हकदार होंगे.

 वास्तविक व्यय के आधार पर होगा भुगतान

सरकार ने साफ किया है कि भत्ते की यह राशि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा वास्तविक व्यय के रूप में बिल प्रस्तुत किए जाने पर ही अधिकतम सीमा तक दी जाएगी. इस प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति विभागीय संलेख ज्ञापांक-2439, दिनांक 27.04.2026 के क्रम में 27.05.2026 को आयोजित बैठक के मद संख्या-20 के रूप में पहले ही दी जा चुकी है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *