Ranchi: सदर अनुमंडल कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के बीच कल के घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है, जिसमें 2 जून को एसडीओ कोर्ट परिसर में कर्मचारी महेंद्र कुमार दास के साथ कथित तौर पर मारपीट और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया गया है. घटना के बाद कर्मचारियों में आक्रोश है और वे दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं.

8 से 10 अधिवक्ता कार्यालय में घुसे और किया हंगामा
पीड़ित कर्मचारी महेंद्र कुमार दास का आरोप है कि 8 से 10 की संख्या में पहुंचे कुछ अधिवक्ताओं ने उनके कार्यालय में आकर अचानक हंगामा शुरू कर दिया और फिर उनके साथ मारपीट की. उनका कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित मामले में नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं किया गया था. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और मामला हाथापाई तक पहुंच गया.
नियमों के खिलाफ काम कराने का बनाया जा रहा दबाव
महेंद्र कुमार दास का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक है और इसमें अधिवक्ताओं की कोई औपचारिक भूमिका नहीं होती, इसके बावजूद कुछ लोग निजी स्वार्थ के तहत आवेदकों के मामलों में हस्तक्षेप करते हैं और कर्मचारियों पर दबाव बनाकर नियमों के विपरीत काम कराने की कोशिश करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने नियमों का पालन करते हुए काम करने की बात कही तो उन्हें निशाना बनाया गया.
Read Also: दिल्ली में दौड़, रांची में नो सिग्नल, राज्यसभा टिकट के फेर में कांग्रेसियों का बढ़ा हार्टबीट
तनाव बढ़ने पर एसडीओ को करना पड़ा हस्तक्षेप
घटना के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्वयं एसडीओ को हस्तक्षेप करना पड़ा. कर्मचारियों के अनुसार एसडीओ ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया और तत्काल विवाद को बढ़ने से रोका. हालांकि समझौते की कोशिश के बावजूद महेंद्र कुमार दास और अन्य कर्मचारी इस समाधान से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. उनका कहना है कि केवल समझौता कराने से मामला समाप्त नहीं हो जाता, बल्कि कानून के तहत कार्रवाई भी होनी चाहिए.
कर्मचारियों की मांग – दोषियों पर हो FIR और मिले सुरक्षा
एसडीओ कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मियों पर इस प्रकार हमला होगा तो उनका मनोबल प्रभावित होगा और प्रशासनिक कार्य बाधित होंगे. कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि मारपीट, अभद्र व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए. साथ ही कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
जन्म प्रमाण पत्र मामलों में “अनावश्यक हस्तक्षेप” रोकने की मांग
कर्मचारियों ने यह भी मांग उठाई है कि जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में अधिवक्ताओं के अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाई जाए. उनका कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया सीधे आवेदक और प्रशासन के बीच होती है, इसलिए बिचौलियापन या दबाव की संस्कृति समाप्त की जानी चाहिए.
