Click Here
Click Here
Click Here
Click Here
Click Here

रिम्स जमीन घोटाला: वार्ड पार्षद सुधा देवी के नाम पर तैयार किया गया था फर्जी वंशावली के लिए दस्तावेज, एसीबी की जांच में खुलासा

SAURAV SINGH Ranchi : रिम्स जमीन घोटाला में एसीबी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. वार्ड नंबर चार की तत्कालीन...

SAURAV SINGH

Ranchi : रिम्स जमीन घोटाला में एसीबी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. वार्ड नंबर चार की तत्कालीन पार्षद सुधा देवी का बयान एसीबी ने जांच के क्रम में रिकॉर्ड किया है. एसीबी की और से ठोस सबूत एकत्र करने के लिए इनसे पूछताछ की गयी है. सुधा देवी ने अपने बयान में जानकारी दी है कि रिम्स की जमीन हड़पने के लिए मेरे नाम से जारी जिस वंशावली का प्रयोग किया गया था वह वंशावली प्रमाण पत्र फर्जी और मनगढ़ंत है.

यह भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: हम पहले से ही कह रहे हैं कि गठबंधन है मजबूत: के. राजू

जमीन घोटाला के लिए खुद को बताया था फर्जी रैयत

एसीबी को जांच के क्रम में पता चला है कि खाता संख्या-107, प्लॉट संख्या-1963 की कुल 93 डिसमिल जमीन में से 60 डिसमिल जमीन वर्ष 1968-69 में रिम्स के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई थी, लेकिन बाद में इसी अधिग्रहित जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर निजी व्यक्तियों और बिल्डरों को बेच दिया गया. जांच में सामने आया कि सोनमइत देवी नामक महिला ने पूर्व में एसएआर वाद संख्या 139/140 (1988-89) दायर कर स्वयं को खतियानी रैयत साहोदरी देवी की वंशज बताया था. हालांकि एसएआर न्यायालय ने 28 दिसंबर 1992 को उसका दावा खारिज कर दिया था क्योंकि वह न तो अपनी वंशावली और न ही अनुसूचित जनजाति से संबंध साबित कर सकी थी. इसके बावजूद बाद के वर्षों में उसके नाम को राजस्व अभिलेखों के रजिस्टर-2 में दर्ज कर दिया गया. एसीबी की जांच में यह भी पता चला है कि राज किशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक तथा उनके दिवंगत भाई नंद किशोर ने स्वयं को उक्त भूमि का उत्तराधिकारी बताते हुए एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी सोनू कुमार सारण के पक्ष में निष्पादित किया.

यह भी पढ़ें: साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग के खाते से उड़ाये 3.88 लाख

आरोपियों द्वारा प्रस्तुत वंशावली और एसएआर कोर्ट में प्रस्तुत वंशाली में भी अंतर

एसीबी को जांच में पता चला है कि आरोपियों द्वारा प्रस्तुत वंशावली और सोनमइत देवी द्वारा एसएआर न्यायालय में प्रस्तुत वंशावली में महत्वपूर्ण अंतर है. इसके अलावा जीपीए और बिक्री दस्तावेजों में भी विभिन्न दावे किए गए हैं. एक ओर आरोपियों ने खुद को नागवंशी क्षत्रिय बताया, वहीं दूसरी ओर भूमि पर दावा सोनमइत देवी के उत्तराधिकारी के रूप में किया गया. एसीबी के अनुसार जीपीए के आधार पर सोनू कुमार सारण ने लगभग 18 डिसमिल जमीन अपनी पत्नी पूजा सारण के नाम 47.52 लाख रुपये के कथित प्रतिफल पर हस्तांतरित की. जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरा लेन-देन विवादित और संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *