Nishu Pandey

Ranchi: लातेहार के पूर्व विधायक रहे बैद्यनाथ राम को झामुमो ने अपना उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह कदम झारखंड की राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा राजनीतिक कदम है. यह सीधे-सीधे परिवारवाद से अलग कार्यकर्ताओं के अंदर मनोबल को बढ़ाने और अनुसूचित जाति समाज में झामुमो की पकड़ को और मजबूत बनाने की कोशिश है.
परिवारवाद से अलग कार्यकर्ताओं को दिया महत्व
राज्यसभा के खाली हुए जिस सीट से झामुमो ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया हैं, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी. मुख्यमंत्री चाहते तो इस सीट से अपने परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बना सकते थे. पार्टी के अंदर शायद ही इसका कोई विरोध करता. लेकिन इससे अलग मुख्यमंत्री ने परिवारवाद से बाहर जाकर एक कार्यकर्ता सरीके नेता को उम्मीदवार बनाया.
हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब हेमंत ने कार्यकर्ता को तरजीह दी है. इससे पहले भी वर्ष 2022 और 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने क्रमशः महुआ माजी और डॉ. सरफराज अहमद को न केवल उम्मीदवार बनाया बल्कि उनकी जीत भी सुनिश्चित की.
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अनुसूचित जाति समाज में पकड़ मजबूत करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने जिस कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है वे अनुसूचित जाति समाज से आते हैं. बैद्यनाथ राम लातेहार विधानसभा (एससी आरक्षित) से तीन बार विधायक रहे चुके हैं. उन्हें उम्मीदवार बनाकर हेमंत ने अनुसूचित जाति समाज में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने की भी बड़ी कोशिश की है.
राज्य की कुल 81 विधानसभा सीटों में 09 अनुसूचित जाति आरक्षित है.
- भाजपा – 03 (सिमरिया, लातेहार, जमुआ)
- झामुमो – 02 (चंदनकियारी, जुगसलाई)
- कांग्रेस – 02 (छतरपुर, कांके)
- लोजपा – 01 (चतरा)
- राजद – 01 (देवघर)
अनुसूचित जनजाति सीटों पर पहले से मजबूत है झामुमो
बता दें कि झामुमो पहले ही अनुसूचित जनजाति सीटों (28 में 21) पर अपनी पकड़ को काफी मजबूत कर चुका है.
अनुसूचित जनजाति सीटें – 28
- झामुमो – 21
- कांग्रेस – 06
- भाजपा – 01
