‘जनता का प्यार ही मेरी ताकत, न्याय की लड़ाई जारी रहेगी’ : तरुण महतों

Seraikela : सरायभाषा आंदोलन और खतियानी आधारित स्थानीय नीति की मांग को लेकर मुखर रहने वाले JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं ईचागढ़...

Seraikela : सरायभाषा आंदोलन और खतियानी आधारित स्थानीय नीति की मांग को लेकर मुखर रहने वाले JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं ईचागढ़ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो लगभग सात माह बाद जेल से रिहा होकर शनिवार को अपने क्षेत्र लौटे. उनकी रिहाई पर समर्थकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने पूरे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में भव्य सम्मान सह बाइक रैली निकालकर जोरदार स्वागत किया.

युवाओं- किसानों की दिखी भारी भागीदारी

चांडिल से शुरू हुई यह बाइक रैली ईचागढ़, नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड के विभिन्न गांवों से होते हुए गुजरी. रैली में बड़ी संख्या में युवाओं, किसानों, मजदूरों एवं आम जनता ने भाग लिया. समर्थक हाथों में JLKM के झंडे और तरुण महतो के पोस्टर लिए ‘तरुण महतो जिंदाबाद’ और ‘झारखंडी अस्मिता जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे. जगह-जगह महिलाओं ने आरती उतारकर उनका स्वागत किया.

‘अवैध बालू के खिलाफ आवाज उठाने पर फंसाया गया’ : समर्थक

ज्ञात हो कि तरुण महतो लंबे समय से क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू कारोबार, सिंडिकेट व्यवस्था तथा उससे प्रभावित छोटे ट्रैक्टर मालिकों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं. उनके समर्थकों का आरोप है कि बालू के अवैध कारोबार के खिलाफ मुखर विरोध और जनहित के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उन्हें साजिशन फंसाकर जेल भेजा गया था. समर्थकों ने इसे जनहित की आवाज को दबाने का प्रयास बताया.

‘जनता का आशीर्वाद ही मेरी पूंजी’ : तरुण महतो

करीब सात माह बाद रिहा हुए तरुण महतो ने क्षेत्र की जनता के बीच लौटकर कहा कि वे भावुक और उत्साहित हैं. उन्होंने कहा, “जनता का प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है. मेरा एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र की जनता के हितों की रक्षा करना, उन्हें न्याय दिलाना और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहना है. मैं आगे भी मजदूरों, किसानों, युवाओं और आम जनमानस के हक एवं अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाता रहूंगा.”

पत्नी भानुमति महतो के योगदान को किया याद

तरुण महतो ने अपनी अनुपस्थिति में क्षेत्र की जनता के बीच रहकर काम करने के लिए धर्मपत्नी भानुमति महतो के योगदान को विशेष रूप से याद किया. भावुक होकर उन्होंने कहा, “मेरी धर्मपत्नी भानुमति महतो मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. उन्होंने मेरे हर सुख-दुख में मेरा साथ दिया. मेरी अनुपस्थिति में भी उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना, समाधान के लिए प्रयास किया और जनता से निरंतर जुड़ी रहीं. आज यदि मुझमें संघर्ष करने का साहस है तो उसमें मेरी पत्नी का बहुत बड़ा योगदान है.” उन्होंने क्षेत्र की जनता, कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों एवं उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस कठिन समय में उनका साथ दिया. “जनता का प्यार और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है. मैं आगे भी न्याय और जनहित की लड़ाई को पूरी ताकत के साथ जारी रखूंगा,” उन्होंने कहा, उनकी रिहाई और सम्मान रैली को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला.

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