धर्मांतरण पर IRS अधिकारी निशा उरांव बोलीं- आदिवासी पहचान बचाने को फिर होगा ‘जनी शिकार’

Khunti: खूंटी के कच्चाबाड़ी में आयोजित पड़धीया पड़हा जतरा में IRS अधिकारी निशा उरांव ने धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और आदिवासी अस्मिता के...

Khunti: खूंटी के कच्चाबाड़ी में आयोजित पड़धीया पड़हा जतरा में IRS अधिकारी निशा उरांव ने धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर तीखा बयान देकर नई बहस छेड़ दी. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति पर बढ़ते खतरे को देखते हुए अब एक नए ‘जनी शिकार’ की जरूरत है.

आदिवासी पहचान और संस्कृति बचाने का किया आह्वान

निशा उरांव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि आदिवासी महिलाओं ने अपनी पहचान और अस्तित्व की रक्षा के लिए वर्षों तक संघर्ष किया था. आज परिस्थितियां बदल गई हैं, लेकिन लड़ाई खत्म नहीं हुई है. अब यह संघर्ष आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों को बचाने का है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच लोगों को यह समझना होगा कि उनकी मूल पहचान और सांस्कृतिक विरासत को कौन और कैसे प्रभावित कर रहा है. समाज को जागरूक और संगठित होकर इसका जवाब देना होगा.

धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग पर उठाए सवाल

धर्मांतरण के मुद्दे पर निशा उरांव ने कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन पैसे, प्रलोभन और बाहरी प्रभाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने दावा किया कि देश में कुछ मामलों में विदेशी फंडिंग और धर्मांतरण के बीच संबंधों की जांच चल रही है. आईआरएस अधिकारी ने हाल की ईडी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों ने कुछ संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की विदेशी राशि आखिर किस उद्देश्य से खर्च की जा रही है, यह देश और समाज दोनों के लिए जानना जरूरी है.

ALSO READ: राज्यसभा का रण: परिमल नथवानी ठोकेंगे ताल, बीजेपी देगी समर्थन, बुलाई गई विधायकों की आपात बैठक

‘सिनगी दई’ की भूमिका का किया उल्लेख

अपने संबोधन में उन्होंने आदिवासी समाज से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल धर्म का नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है. उन्होंने कहा कि आज कई नई ‘सिनगी दई’ समाज में मौजूद हैं, जो कानून, संविधान और जनआंदोलन के जरिए आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *