चतरा: मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के बाद 8 माह की गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत, उठे कई सवाल

– तीन दिन में इलाज के नाम पर लिया 25 हजार, फिर ऑपरेशन के लिए मांगे 40 हजार – झोलाछाप विकास यादव...

– तीन दिन में इलाज के नाम पर लिया 25 हजार, फिर ऑपरेशन के लिए मांगे 40 हजार
– झोलाछाप विकास यादव तीन अन्य झोलाछाप के साथ मिलकर संचालित करता है मेदांता हॉस्पिटल
– इसमें स्वघोषित रंगदार बताने वाले एक नेता भी हैं पार्टनर

Chatra: जिले में एक बार फिर झोलाछाप इलाज के चक्कर में एक गर्भवती महिला की मौत हो गई. शहर के बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के बाद लावालौंग थाना क्षेत्र के चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी बैजंती देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई. बैजंती देवी आठ माह की गर्भवती थी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई. इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है. परिजनों के अनुसार चतरा बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता नर्सिंग होम में तीन जून से महिला का इलाज चल रहा था. तीन दिनों में मरीज के परिजनों से इलाज के नाम पर 25 हजार रुपए ले लिए गए. छह जून को परिजनों को बताया गया कि महिला की स्थिति गंभीर है. ऑपरेशन कर बच्चा निकालना पड़ेगा. इसके लिए 40 हजार रुपए जमा करना पड़ेगा. जब परिजनों ने कहा कि उनके पास 40 हजार नहीं है तो हॉस्पिटल से महिला को वापस घर भेज दिया गया. महिला घर पहुंची और उसकी मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि हॉस्पिटल में ही इलाज के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी थी. इसके बाद ही महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. हॉस्पिटल ने ऑपरेशन के लिए 40 हजार नहीं देने पर इलाज नहीं किया और महिला को वापस घर भेज दिया.

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ब्लड चढ़ाने के बाद बिगड़ी हालत

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया. इसके लिए उनसे 9 हजार रुपए अलग से लिए गए. आरोप यह भी है कि रक्त चढ़ाने से पहले आवश्यक प्रक्रिया और क्रॉस मैचिंग नहीं की गई. रक्त चढ़ाने के बाद ही महिला की स्थिति और गंभीर हो गई. स्वास्थ्य नियमों के अनुसार रक्तदान, रक्त की जांच और क्रॉस मैचिंग की प्रक्रिया अधिकृत ब्लड बैंक के माध्यम से ही की जानी चाहिए. ऐसे में पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

दो मौतों से टूटा परिवार, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल

बैजंती देवी की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है. जिस घर में कुछ दिनों बाद बच्चे की किलकारी गूंजने वाली थी, वहां आज मातम पसरा हुआ है. एक ही घटना में मां और अजन्मे बच्चे की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है. गांव में हर आंख नम है और लोग इस घटना को लेकर दुख और गुस्सा दोनों जाहिर कर रहे हैं.

मामले को दबाने की कोशिश जारी

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन मामले को मैनेज करने में जुटा हुआ है. अस्पताल प्रबंधन के कुछ लोग मृतक के घर पर जमे हुए हैं. मृतक के परिजनों को कुछ ले देकर मामला को रफादफा करने का दबाव बना रहे हैं. मेदांता हॉस्पिटल के लोग मामला थाना तक नहीं पहुंचे, इसके लिए हर संभव प्रयास में जुटे हुए हैं. खबर लिखे जाने तक मृतका का शव चुकु गांव में रखा हुआ है. परिजन और ग्रामीण दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

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बड़ा सवाल : आखिर मेदांता को कैसे मिल गया क्लिनिकल सर्टिफिकेट

इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी नर्सिंग होमों की कार्यशैली और सिविल सर्जन कार्यालय के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बता दें कि मेदांता हॉस्पिटल का संचालन झोलाछाप डाक्टर विकास यादव के द्वारा किया जा रहा है. विकास यादव इससे पहले बगरा मोड़ में पारस नाम से हॉस्पिटल चलाता था. जिले के निवर्तमान उपायुक्त रमेश घोलप ने फर्जी और झोलाछाप डाक्टरों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की थी. उस दौरान अवैध रूप से संचालित पारस हॉस्पिटल को बंद करा दिया गया था. बगरा में हॉस्पिटल बंद होने के बाद विकास यादव ने चतरा बस स्टैंड में तीन अन्य झोलाछाप चिकित्सकों के साथ मिलकर मेदांता के नाम से हॉस्पिटल खोल दिया. इसमें अपने आप को नेता और स्वघोषित रंगदार मानने वाले एक व्यक्ति भी पार्टनर हैं. इसमें सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जिस पारस हॉस्पिटल को प्रशासन को बंद कराया गया, उसी व्यक्ति को फिर से हॉस्पिटल चलाने के लिए सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा फिर से क्लिनिकल सर्टिफिकेट दे दिया गया.

इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है: प्रभारी सिविल सर्जन

इस मामले में प्रभारी सिविल सर्जन सह सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार ने कहा कि उन्होंने मेदांता हॉस्पिटल जाकर मामले की जांच की. इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है. मरीज को जो रक्त चढ़ाया गया है, वह पता नहीं कहां से लाकर चढ़ाया गया. चतरा में रक्त के लिए एकमात्र साधन रेड क्रॉस का ब्लड बैंक है, जहां से रक्त नहीं लिया गया है. अब तक मृतक के परिजनों के द्वारा आवेदन भी नहीं मिला है. यदि परिजन इस मामले की लिखित शिकायत करते हैं तो आरोपी अस्पताल व उसके संचालकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.

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