Seraikela : चांडिल वन क्षेत्र के अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना से विस्थापित पूर्ण विस्थापित गांव कालीचमदा में जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया. पिछले दिनों हाथियों ने गांव में घुसकर लगभग एक दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया. घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है.
तत्काल पहुंचे वनपाल, किया मुआयना
घटना की सूचना मिलते ही चांडिल वन क्षेत्र के वनपाल वशिष्ठ नारायण महतो दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने क्षतिग्रस्त घरों का मुआयना किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर नुकसान का जायजा लिया. वनपाल ने कहा, “सेवा ही हमारा लक्ष्य है. वन्यजीव-मानव संघर्ष में ग्रामीणों को राहत पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है.”

लाइट और पटाखों का किया वितरण
हाथियों के दोबारा हमले की आशंका को देखते हुए वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो के द्वारा ग्रामीणों के बीच तत्काल टॉर्च, सर्च लाइट एवं पटाखों का वितरण किया गया। उन्होंने ग्रामीणों को रात में समूह में रहने, आग जलाकर निगरानी करने और हाथी दिखने पर वन विभाग को तुरंत सूचित करने की सलाह दी.
84 मौजा के विस्थापित गांव में दहशत
ज्ञात हो कि स्वर्णरेखा परियोजना द्वारा विस्थापित 84 मौजा में कालीचमदा एक पूर्ण विस्थापित गांव है. जंगल से सटे होने के कारण यहां आए दिन हाथियों का झुंड भोजन-पानी की तलाश में गांव में घुस आता है. धान की फसल और महुआ के मौसम में हाथियों का आतंक बढ़ जाता है. वनपाल ने आश्वासन दिया कि क्षति का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. साथ ही हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए विशेष गश्ती दल तैनात किया गया है. ग्रामीणों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और वन विभाग का सहयोग करें.
