भारतीय पुरुषों की क्यों निकलती है तोंद? विदेशी लोग क्यों दिखते हैं ज्यादा फिट

News Wave Desk : भारत में बढ़ती पेट का मोटापा अब केवल मध्यम आयु के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है....

News Wave Desk : भारत में बढ़ती पेट का मोटापा अब केवल मध्यम आयु के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है. आज 25-35 वर्ष के युवाओं में भी बाहर निकला हुआ पेट आम दृश्य बनता जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कोई “जेनेटिक जादू” नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली, खराब खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी बड़ी वजह है. हालिया अध्ययनों में भी सामने आया है कि भारतीयों की डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत अधिक और प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम है, जिससे पेट के आसपास चर्बी जमा होने का खतरा बढ़ जाता है.

क्यों बढ़ रहा है पेट का मोटापा?

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीयों के खाने में रोटी, चावल, आलू और मीठी चीजें ज्यादा होती हैं. ICMR-INDIAB सर्वे के मुताबिक लोगों की रोजाना मिलने वाली कैलोरी का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से आता है, जबकि प्रोटीन का सेवन कम होता है. जब शरीर को जरूरत से ज्यादा कार्ब्स मिलते हैं और शारीरिक मेहनत कम होती है, तो अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा होने लगती है. इसका असर सबसे पहले पेट पर दिखाई देता है, जिससे तोंद और पेट की चर्बी बढ़ने लगती है. विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित व्यायाम से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.

बैठने वाली जीवनशैली भी बड़ी वजह

पिछले कुछ वर्षों में ऑफिस जॉब, वर्क फ्रॉम होम और स्क्रीन टाइम बढ़ने से लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम हुई हैं. लंबे समय तक बैठे रहने और नियमित व्यायाम न करने से कैलोरी खर्च नहीं हो पाती, जिसका सीधा असर वजन और कमर के आकार पर पड़ता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि शारीरिक निष्क्रियता और खराब खानपान मिलकर पेट की चर्बी को तेजी से बढ़ाते हैं.

देर रात खाना और मीठी चाय का असर

भारतीय परिवारों में देर रात भारी भोजन करने की परंपरा काफी आम है. इसके अलावा दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट, नमकीन और तले हुए स्नैक्स का सेवन अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाता है. जब शरीर इन कैलोरी को खर्च नहीं कर पाता तो यह पेट के आसपास जमा होने लगती है.

कम नींद और ज्यादा तनाव भी जिम्मेदार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार तनाव और पर्याप्त नींद की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती है. इससे भूख बढ़ सकती है, मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है और वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है. पेट की चर्बी का संबंध केवल खानपान से नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली से भी जुड़ा हुआ है.

क्या विदेशी लोग वास्तव में ज्यादा फिट होते हैं?

यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि सभी विदेशी लोग फिट होते हैं. पश्चिमी देशों में भी मोटापे की समस्या मौजूद है. हालांकि वहां नियमित जिम, रनिंग, साइक्लिंग, स्पोर्ट्स और हाई-प्रोटीन डाइट को अधिक महत्व दिया जाता है. इसलिए कई लोग उम्र बढ़ने के बाद भी फिट और मुश्किल दिखाई देते हैं. दूसरी ओर भारत में फिटनेस को अक्सर तब तक प्राथमिकता नहीं दी जाती जब तक स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने न आ जाए.

पेट की चर्बी सिर्फ दिखने की नहीं, स्वास्थ्य की भी समस्या

डॉक्टरों के मुताबिक पेट के अंदर जमा होने वाला विसरल फैट (Visceral Fat) सबसे खतरनाक माना जाता है. यह टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, हृदय रोग और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है.

तोंद कम करने के लिए क्या करें?

  • विशेषज्ञों का कहना है कि केवल क्रैश डाइट से पेट कम नहीं होगा. इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में बदलाव जरूरी है.
  • हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें, जैसे अंडा, दाल, पनीर, दही, मछली या चिकन.
  • रोजाना 8 से 10 हजार कदम चलने का लक्ष्य रखें.
  • सप्ताह में कम से कम 4-5 दिन व्यायाम करें.
  • चीनी, मीठी चाय और जंक फूड कम करें.
  • रात का भोजन जल्दी और हल्का लें.
  • 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें.
  • तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें.

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