वनों की सुरक्षा और रोजगार के लिए 38.43 करोड़ मंजूर, शत-प्रतिशत डिजिटल और डीबीटी से होगा भुगतान

Ranchi : वन विभाग ने वन प्रबंधन सुविधा योजना के सुचारू संचालन और कार्य योजना तैयार करने के लिए राज्य के सभी...

Ranchi : वन विभाग ने वन प्रबंधन सुविधा योजना के सुचारू संचालन और कार्य योजना तैयार करने के लिए राज्य के सभी वन प्रमंडलों को 38 करोड़ 43 लाख 78 हजार रुपये की राशि का प्रदान की है. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), झारखंड की ओर से जारी इस आधिकारिक आदेश के तहत प्रदेश के सभी वन्यजीव और वन प्रमंडलों को दिशा-निर्देश जारी कर काम में तेजी लाने कहा गया है. इस राशि का मुख्य उद्देश्य वनों का संरक्षण, विकास और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करना है.

मजदूरी मद और आपूर्ति मद में दी गई है राशि

ग्रामीण और वन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ी हिस्सेदारी मजदूरी को दी गई है. इसके लिए 29. 51 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. आपूर्ति एवं सामग्री मद वन प्रबंधन से जुड़े उपकरणों, पौधा रोपण सामग्री और अन्य आवश्यक आवश्यकताओं के लिए 8.92 करोड़ रुपये दिए गए हैं. झारखंड के सभी 32 वन प्रमंडलों को उनके भौगोलिक क्षेत्र (हेक्टेयर में) और आवश्यकताओं के आधार पर राशि का उप-आवंटन किया गया है.

भ्रष्टाचार पर नकेल : शत-प्रतिशत डिजिटल और डीबीटी भुगतान

इस बार सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए बेहद कड़ा रुख अपनाया है. आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी स्तर पर नकद भुगतान नहीं किया जाएगा. सभी श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान अनिवार्य रूप से डीबीटी या सीधे बैंक-डाकघर खाते के माध्यम से ही किया जाएगा. मजदूरी का भुगतान झारखंड सरकार के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम और नवीनतम मजदूरी दर के अनुरूप ही सुनिश्चित करना होगा.

पारदर्शिता के लिए बैंक स्टेटमेंट

निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी को भुगतान के साक्ष्य के रूप में मास्टर रोल और वाउचर के साथ बैंक स्टेटमेंट का मिलान करना अनिवार्य होगा. मास्टर रोल में श्रमिकों के बैंक अकाउंट नंबर के साथ उनके फोन नंबर भी दर्ज करने को कहा गया है. अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों का किसी अन्य केंद्रीय या राज्य प्रायोजित योजना से दोहराव नहीं होना चाहिए. प्रमंडलीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो कार्य कैंपा, वन्यप्राणी पर्यावास का समेकित विकास, पलामू व्याघ्र परियोजना, वन अग्नि रोकथाम एवं प्रबंधन योजना, या हाथी परियोजना जैसी बड़ी योजनाओं के तहत कवर हो रहे हैं, उन्हें इस बजट से दूर रखा जाए.

सामाजिक अंकेक्षण और थर्ड पार्टी मूल्यांकन

योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन को परखने के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र तैयार किया है. अब तक के पिछले 3 वर्षों के कार्यों का अनिवार्य रूप से सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा. योजना की निष्पक्ष समीक्षा के लिए किसी प्रतिष्ठित बाहरी संस्थान से इसका ‘तृतीय पक्ष मूल्यांकन’ कराया जाएगा. योजना के सफल क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारियों को सौंपी गई है. जिन्हें निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बनाया गया है. सभी डीएफओ को हर महीने की 5 तारीख तक अपने कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी होगी. इसके साथ ही, महालेखाकार कार्यालय में मासिक लेखा भी जमा करना होगा. खातों में किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए हर तीन महीने पर खातों का त्रैमासिक मिलान कराना अनिवार्य होगा.

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

तकनीकी स्वीकृति के बिना कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा. जिन प्रमंडलों या कार्यान्वयन एजेंसियों का कार्य संतोषप्रद नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और इसकी रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय भेजी जाएगी. इसके अलावा, टैक्स कटौती में किसी भी प्रकार के उल्लंघन के लिए संबंधित डीडीओ को व्यक्तिगत रूप से दोषी माना जाएगा.

सबसे ज्यादा राशि पाने वाले शीर्ष प्रमंडल

• मेदिनीनगर वन प्रमंडल : 1,58,519.46 हेक्टेयर के वन क्षेत्र के साथ इसे सबसे अधिक 259.52 लाख रुपये मिले हैं.
• लातेहार वन प्रमंडल : 1,13,807.06 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 197.55 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं.
• सिमडेगा वन प्रमंडल : 1,11,260.97 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लिए 192.73 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है.
• गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल : इस प्रमंडल को 187.21 लाख रुपये मिला है.
• हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल : इसे 180.97 लाख रुपये की राशि सौंपी गई है.
• पाकुड़ वन प्रमंडल : 6,775.17 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 48.21 लाख रुपये.
• जामताड़ा वन प्रमंडल : 6,978.33 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 48.13 लाख रुपये.
• पलामू व्याघ्र परियोजना, दक्षिणी प्रमंडल : 10,042.5 हेक्टेयर के लिए 82.93 लाख रुपये दिए गए हैं.

 

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