जंग का असर तेल बाजार पर भारी, क्रूड ऑयल की कीमत ने पार किया 100 डॉलर

NEWS DESK: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. हालात ऐसे हो गए...

NEWS DESK: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. हालात ऐसे हो गए हैं कि क्रूड ऑयल की कीमत पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है. सोमवार, 9 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. साल 2022 के बाद यह पहला मौका है जब क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर के पार गए हैं.

आज कच्चे तेल की कीमत क्या है?

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. इस तनाव का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत करीब 18.35 डॉलर यानी लगभग 19.8 प्रतिशत बढ़कर 111.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इससे पहले इसकी कीमत 107.07 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.

वहीं West Texas Intermediate Crude Oil (WTI) की कीमत भी 15.27 डॉलर यानी करीब 16.8 प्रतिशत बढ़कर 106.17 डॉलर प्रति बैरल हो गई. पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड करीब 27 प्रतिशत और WTI क्रूड लगभग 35.6 प्रतिशत महंगा हो चुका है.

क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं तेल के दाम?

मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादन क्षेत्र माना जाता है. यहां से कई देशों को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल सप्लाई किया जाता है. मौजूदा युद्ध के कारण इस इलाके में कई जगह हमले हो रहे हैं. तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है और कई जगह उत्पादन भी प्रभावित हुआ है.

इसके अलावा सबसे बड़ा कारण Strait of Hormuz को लेकर बढ़ा संकट है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बहुत अहम है क्योंकि वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर असर पड़ा है और कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है.सप्लाई में दिक्कत और शिपिंग-बीमा खर्च बढ़ने से तेल आयात महंगा पड़ सकता है.हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

हालांकि सरकार ने फिलहाल कहा है कि अभी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है और तेल कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने के लिए कहा गया है. जानकारों के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है.

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