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हजारीबाग: चौपारण सामुदायिक अस्पताल में फिर पहुंची जांच टीम, मरीजों की सुविधाओं पर टिकीं निगाहें

Hazaribagh : चौपारण सामुदायिक अस्पताल में चल रहे प्रशासनिक विवादों और विभिन्न शिकायतों की जांच के लिए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की...

Hazaribagh : चौपारण सामुदायिक अस्पताल में चल रहे प्रशासनिक विवादों और विभिन्न शिकायतों की जांच के लिए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम अस्पताल पहुंची. जांच दल में डीएलओ डॉ. एस.के. राजन, मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल कुमार, डिस्ट्रिक्ट डाटा मैनेजर दिवाकर अंबष्ट तथा मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशि जायसवाल शामिल थे. टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की. गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी उपायुक्त के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में एक जांच टीम अस्पताल पहुंची थी. उस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. डी.एन. ठाकुर और पूर्व प्रभारी डॉ. फरहाना महफूज से कई घंटों तक पूछताछ कर विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी ली गई थी.

प्रशासनिक विवादों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका

बताया जा रहा है कि पूर्व प्रभारी डॉ. फरहाना महफूज का वेतन रोके जाने तथा वर्तमान प्रभारी डॉ. डी.एन. ठाकुर द्वारा उन पर लगाए गए कथित लापरवाही के आरोपों का मामला अभी तक सुलझ नहीं पाया है. इसी क्रम में जांच टीम ने अस्पताल कर्मियों को आवंटित सरकारी क्वार्टरों, अस्पताल में उपलब्ध उपकरणों की खरीद और उनके उपयोग से संबंधित अभिलेखों का भी मिलान किया. जांच के दौरान टीम ने विभिन्न पक्षों से बातचीत की और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की. टीम के सदस्यों ने बताया कि तथ्यों और जांच के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सिविल सर्जन को सौंप दी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा.

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मरीजों की चिंता सबसे अहम

अस्पताल में चल रहे विवादों और लगातार हो रही जांचों के बीच सबसे बड़ी चिंता मरीजों और उनके परिजनों की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक खींचतान और आपसी आरोप-प्रत्यारोप का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं पड़ना चाहिए. मरीजों को समय पर इलाज, जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि अस्पताल में कुछ चिकित्सकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. आरोप है कि कुछ चिकित्सक महीनों तक नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते, फिर भी उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जबकि कुछ मामलों में प्रशासन का रवैया अपेक्षाकृत अधिक सख्त दिखाई देता है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच टीम विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है. अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है. लोगों को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, विवादों का समाधान निकलेगा और अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के साथ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी.

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