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क्रॉस वोटिंग के चाबुक से पस्त हुई कांग्रेस: के. राजू का सनसनीखेज आरोप- RJD-वामदलों ने पैसे लेकर बेच दिए ईमान

Ranchi: झारखंड की सियासत में गुरुवार को वह भूचाल आ गया, जिसकी पटकथा तो पर्दे के पीछे लिखी जा रही थी, लेकिन...

Ranchi: झारखंड की सियासत में गुरुवार को वह भूचाल आ गया, जिसकी पटकथा तो पर्दे के पीछे लिखी जा रही थी, लेकिन नतीजों ने सत्ताधारी ‘इंडिया’ गठबंधन के पैरों तले से जमीन खिसका दी. राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए रण में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने बाजी मार ली है.

वहीं, कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवार प्रणव झा को करारी और अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है. इस हार ने न सिर्फ कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि झारखंड में गठबंधन की सरकार के भविष्य पर भी बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

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वोटों का गणित: दावों की ढपली, हकीकत की थाप

चुनाव के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पर्दे के पीछे किस कदर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ और क्रॉस वोटिंग का खेल खेला गया. 81 सदस्यीय विधानसभा में से 3 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए, जिनमें एनडीए के 2 और कांग्रेस का 1 वोट शामिल है. कुल वैध 78 वोटों का बंटवारा कुछ इस तरह हुआ, जिसमें बैजनाथ राम को 31 वोट , परिमल नाथवानी को 28 वोट और प्रणव झा महज 19 वोट मिले. यह परिणाम इसलिए सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है क्योंकि कागजों पर ‘इंडिया’ गठबंधन के पास 56 विधायकों का स्वाभाविक बहुमत था. इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार का 20 का आंकड़ा भी पार न कर पाना इस बात का सबूत है कि गठबंधन के भीतर गहरी सेंधमारी हो चुकी है.

कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने RJD-वामदलों पर लगाया ‘बिकने’ का आरोप

हार से तमतमाए कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता और झारखंड प्रभारी के. राजू ने नतीजों के तुरंत बाद बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया. उन्होंने सहयोगियों पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हमें राष्ट्रीय जनता दल और वामदलों ने खुलेआम धोखा दिया है. इन पार्टियों के विधायकों ने भारी-भरकम पैसा लेकर एनडीए समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी के हक में वोटिंग की है.

के. राजू ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 16 विधायक पूरी तरह एकजुट थे और प्रणव झा को कांग्रेस के सभी वोट मिले. जब उनसे पूछा गया कि क्या इस ‘धोखे’ का असर हेमंत सोरेन सरकार की सेहत पर पड़ेगा, तो उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा, भविष्य में इस विषय को गंभीरता से देखेंगे. सरकार में बने रहना है या नहीं, इस पर शीर्ष नेतृत्व के साथ बड़ी समीक्षा बैठक होगी.

कैबिनेट मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का तीखा वार: ‘मंथन भी होगा और ऐक्शन भी’

हेमंत कैबिनेट में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रदेश प्रभारी के सुर में सुर मिलाते हुए सहयोगियों को कटघरे में खड़ा किया.उन्होंने कहा कि राजद और वामदल के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की पूरी आशंका है। दीपिका ने साफ कहा कि अगर हमारे प्रदेश प्रभारी ने ऐसा बयान दिया है, तो उनके पास पुख्ता जानकारी होगी और वह बिल्कुल सही कह रहे हैं. हमारे पास जेएमएम का पर्याप्त सहयोग था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 4 मतों का जो वादा किया था, वह हमें मिला और जेएमएम से द्वितीय वरीयता के वोट भी ट्रांसफर हुए.उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भले ही सरकार गिरने की बात कहना जल्दबाजी हो, लेकिन इस धोखे पर गठबंधन के अंदर आत्ममंथन और बड़ी कार्रवाई होना तय है. पूरी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जा रही है.

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परिमल नाथवानी की ‘हैट्रिक’: BJP का कांग्रेस पर पलटवार

यह तीसरा मौका है जब उद्योगपति परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा की दहलीज लांघने में कामयाब रहे हैं. इस जीत के साथ ही उन्होंने झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में अपना तीसरा कार्यकाल सुनिश्चित कर लिया है. दूसरी तरफ, कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने तीखा पलटवार किया है। साहू ने कहा कि जब हमने चुनाव में उतरने और नाथवानी जी का समर्थन करने का फैसला किया था, तब कांग्रेस बड़ी-बड़ी डींगें हांक रही थी कि परिमल नाथवानी रेस में कहीं टिकेंगे ही नहीं. अब जब वे अपनी ही कमियों और अंतर्विरोधों के कारण बुरी तरह हार गए हैं, तो अपनी नाकामी छुपाने के लिए धनबल का रोना रो रहे हैं। भाजपा पैसों का लेन-देन नहीं करती, ये सारे कुकृत्य कांग्रेस की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं.

झारखंड की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत

इस राज्यसभा चुनाव ने झारखंड की गठबंधन सरकार के भीतर पनप रहे अविश्वास को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है. राजद के 4 और वामदल के 2 विधायकों पर लगे ‘पैसे लेकर वोट बेचने’ के आरोपों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार पर हमला करने का सबसे बड़ा हथियार दे दिया है. अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है. यदि कांग्रेस अपने प्रभारी के बयान पर अड़ी रहती है, तो झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस-राजद का यह कुनबा बिखरने की कगार पर पहुंच सकता है. देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस सियासी डैमेज को कंट्रोल कैसे करते हैं, या फिर यह चुनाव झारखंड सरकार के पतन की पहली तारीख साबित होने जा रहा है.

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