Saraikela. शहर के नगर पंचायत क्षेत्र में चापाकल मरम्मत के नाम पर 25 लाख रुपये की निकासी का मामला सामने आया है. क्षेत्र में कुल 238 चापाकल हैं, लेकिन मरम्मत के बाद भी सभी सूखे पड़े हैं. बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही जनता में अब आक्रोश भड़क उठा है.
कागज पर लाखों की मरम्मत, जमीन पर सन्नाटा
जांच में सामने आया कि वर्ष 2021-22 में चापाकल मरम्मत के लिए विभाग ने 1.58 लाख रुपये दिए थे. अगले वर्ष इसी मद में 15.16 लाख रुपये खर्च दिखाए गए. वर्ष 2024-25 में फिर 7.72 लाख रुपये की निकासी की गई. इस तरह तीन वर्षों में कुल लगभग 25 लाख रुपये खर्च किए गए.
लेकिन हकीकत कुछ और है. चापाकलों में हेड लगाने के नाम पर 45 हेड खरीदे गए, जबकि जमीन पर सिर्फ 5 हेड ही लगाए गए हैं. बाकी 40 हेड कहां गए, इसका जवाब नगर पंचायत के पास नहीं है. RTI कार्यकर्ता द्वारा जानकारी मांगे जाने के बावजूद विभाग ने अब तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है.
पानी के लिए भटक रही जनता
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या चार दिन की नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है. पानी नहीं मिलने के कारण लोग दूर-दूर से पानी खरीदकर लाने को मजबूर हैं. जेल और सरकारी कार्यालयों में भी पानी की किल्लत बनी हुई है.
जब सरायकेला विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रतिनिधि सनत आचार्य ने पानी की समस्या को लेकर सवाल उठाए, तो नगर पंचायत अध्यक्ष को यह नागवार गुजरा. आरोप है कि अध्यक्ष ने अधिकारियों के सामने ही विधायक प्रतिनिधि के साथ बदसलूकी की.
सड़क जाम अल्टीमेटम
आक्रोशित लोगों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 2 दिनों के भीतर पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर जाम लगाएंगे. साथ ही सड़क पर ही कैंप लगाएंगे और जरूरत पड़ने पर पानी के लिए भीख मांगने को मजबूर होंगे.
नगर पंचायत अध्यक्ष बने चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन कथित घोटाले पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस चापाकल घोटाले में अध्यक्ष की भी कोई भूमिका है. फिलहाल जनता को सिर्फ पानी चाहिए.
घोटाले के आंकड़े
- कुल चापाकल: 238
- कुल खर्च (2021-25): लगभग 25 लाख रुपये
- खरीदे गए हेड: 45
- लगे हेड: 5
- गायब हेड: 40



