Seraikela : कपाली ओपी थाना क्षेत्र में एक आदिवासी महली युवती के साथ कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार और मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के आरोप को लेकर आदिवासी समाज का विरोध तेज हो गया है. महली आदिवासी समाज समेत विभिन्न आदिवासी सामाजिक, पारंपरिक और जनसंगठनों ने 22 जून 2026 को सरायकेला-खरसावां पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि पीड़िता और उसके परिजन शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और मामला दर्ज नहीं किया गया. इसे लेकर आदिवासी संगठनों में आक्रोश है. संगठनों ने दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है. आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा. उनका कहना है कि यदि कानून के रक्षक ही कानून का उल्लंघन करते हैं, तो उनके खिलाफ भी समान रूप से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों के विरुद्ध जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा.
महिला उत्पीड़न और संदिग्ध मौतों पर भी उठे सवाल
संगठनों ने आरोप लगाया कि जिले में महिलाओं के साथ कथित पुलिसिया अत्याचार और दो महिलाओं की संदिग्ध मौतों के मामलों में भी पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही है. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है. इस आंदोलन को विभिन्न आदिवासी समुदायों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिल रहा है. समर्थकों का कहना है कि न्याय, मानवाधिकार, आदिवासी अस्मिता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए समाज एकजुट है.
आयोगों और सरकार से हस्तक्षेप की मांग
आंदोलन को दिनकर कच्छप, शंकर सेन महली, नारायण महतो, राहुल महली, इंदर हेंब्रम, सत्यनारायण मुर्मू, लालतु महतो, अजय जामुदा, परशुराम महतो और रबीन्द्रनाथ सिंह सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों का समर्थन प्राप्त है. आदिवासी समाज ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस महानिदेशक, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है.
प्रमुख मांगें
- कपाली ओपी प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए
- संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाए
- दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी जाए
- पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा एवं उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए
- प्राथमिकी दर्ज करने में बाधा डालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
- SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
- 12 जून को भूमिज महिला पर हमले के आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाए
- कुकरू और नीमडीह में हुई संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए
आदिवासी समाज ने अपने बयान में कहा कि न्याय, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा लोकतंत्र की मूल आधारशिला है. समाज की आवाज को गंभीरता से सुना जाए और दोषियों के विरुद्ध कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
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