अजय दयाल
Ranchi: भाकपा-माओवादी के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा, उर्फ मनीष दा, उर्फ कृष्णा दा, उर्फ बुढ़ा की मृत्यु 3 अप्रैल 2026 को रिम्स में इलाज के दौरान हो गई. वह होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद था. बीमारी के बाद उसे रिम्स में भर्ती कराया गया था. लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अदालत को यह नहीं बताया है कि उसकी मौत हो चुकी है.
NIA कोर्ट को नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद मामले को एनआईए ने टेकओवर किया था. एनआईए कोर्ट ने कई बार तारीख मुकर्रर की, लेकिन इतनी तारीखें बीत जाने के बाद भी पुलिस ने प्रशांत बोस की मृत्यु के बाद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक एनआईए की विशेष अदालत को उपलब्ध नहीं कराई है. कहा जाए कि पुलिस ने रिपोर्ट अदालत में समर्पित नहीं की है, जिससे अदालत को यह जानकारी नहीं है कि प्रशांत बोस की मृत्यु हो चुकी है.
एक करोड़ का इनामी नक्सली था प्रशांत बोस
उल्लेखनीय है कि झारखंड, बिहार, बंगाल और ओड़िशा में प्रशांत बोस सक्रिय था. प्रशांत बोस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. झारखंड पुलिस और आईबी की टीम ने 12 नवंबर को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा-मुंडारी टोल प्लाजा के पास प्रशांत बोस को गिरफ्तार किया था. प्रशांत बोस को उसकी पत्नी शीला मरांडी सहित छह नक्सलियों के साथ गिरफ्तार किया गया था.
कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड था बोस
नक्सली प्रशांत बोस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने, सांसद सुनील महतो, पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या तथा शस्त्रागार से हथियार लूटने का मास्टरमाइंड माना जाता था.
पुलिस के मुताबिक, प्रशांत बोस उर्फ किशन दा भीमा कोरेगांव हिंसा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में भी शामिल था. एनआईए की चार्जशीट में बोस का नाम आया था. इतना ही नहीं, वह पूर्वी सिंहभूम में सांसद सुनील महतो हत्याकांड, वर्ष 2004 में गिरिडीह में गृह रक्षा वाहिनी के शस्त्रागार लूटकांड और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या का भी मास्टरमाइंड था.
देशभर की बड़ी नक्सली घटनाओं से जुड़ा नाम
इसके अलावा सारंडा में 16 पुलिसकर्मियों की हत्या, बिहार का जहानाबाद जेल ब्रेक, महाराष्ट्र की भीमा कोरेगांव हिंसा और छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में डेढ़ दर्जन से अधिक जवानों की शहादत के पीछे भी प्रशांत बोस का ही प्लान बताया जाता है.
झारखंड में दर्ज हैं 50 मामले
झारखंड के पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा ने प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद बताया था कि बोस की गिरफ्तारी सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि सभी नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने बताया था कि प्रशांत बोस ने पूछताछ में माओवादी संगठन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी थीं.
बोस पर झारखंड, बिहार, बंगाल और ओड़िशा समेत कई राज्यों में मामले दर्ज हैं. अकेले झारखंड में ही प्रशांत बोस के खिलाफ 50 मामले दर्ज हैं.


